गढ़शंकर, 8 नवंबर: केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत करोड़ों रुपये की लागत से गांवों में कूड़ा प्रबंधन के लिए बनाए गए कूड़ा डंप लोगों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। ये कूड़ा डंप स्वच्छता की ओर एक कदम हैं और इन पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट स्कीम के बोर्ड लगे हुए हैं। लेकिन ये कूड़ा डंप लोगों के लिए परेशानी और बीमारियों का कारण साबित हो रहे हैं।
इसी योजना के तहत हिमाचल प्रदेश जाने वाली मुख्य सड़क के पास बीत क्षेत्र के मैहिंदवानी गांव में भी कूड़ा डंप बनाया गया था। जिसमें गांव के लोग कूड़ा फेंक रहे हैं। लेकिन लंबे समय से इस कूड़ा डंप की सफाई न होने के कारण दूर-दूर तक इस कूड़े डंप से बदबू आ रही है। हालात ये हैं कि इस कूड़े के ढेर की दुर्गंध के कारण सड़क पर गुजरना मुश्किल हो गया है, जिससे बीमारियां फैलने का भी डर बना हुआ है। इस कूड़े के ढेर में हर समय कुत्ते और आवारा मवेशी कचरे के आसपास घूमते देखे जा सकते हैं। जिससे दुर्गंध और बढ़ जाती है। इस संबंध में संपर्क करने पर सरपंच नरेश सिंह ने कहा कि यह कूड़ा डंप उनसे पहले के सरपंच ने बनवाया था। कूड़ा डंप बनने के 2 महीने बाद ही इसकी सड़क किनारे की दीवार गिर गई। उन्होंने कहा कि गांव के लोग यहां मृत पशु (मवेशी) भी फेंक देते हैं। सरपंच ने कहा कि पंचायत के पास सफाई के लिए फंड नहीं है, तो मैं कैसे सफाई करवाऊं ? उन्होंने यह भी कहा कि दुर्गंध के कारण कोई भी मजदूर यहां काम करने को तैयार नहीं है। अंत में सरपंच ने कहा कि मैं पंचायतों से बात कर जल्द ही सफाई करवाऊंगा और समस्या का समाधान करूंगा।
