चंडीगढ़ : सोनू शाह हत्याकांड में शुक्रवार को तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सजा पाने वालों में शुभम, मंजीत और राजन उर्फ जाट शामिल हैं। यह तीनों ही वह शूटर थे जो सोनू शाह को मारने के लिए उसके ऑफिस में घुसे थे और गोलियां चलाई थी।
सोनू के बड़े भाई और इस केस के चश्मदीद गवाह प्रवीण शाह ने तीनों शूटरों की अदालत में शिनाख्त की थी, जिसके आधार पर आरोप साबित हुए। अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपित और गैगस्टर लाॅरेंस बिश्नोई समेत पांच आरोपितों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
पुलिस का कहना था कि लाॅरेंस बिश्नोई के इशारे पर इन शूटरों ने सोनू शाह की हत्या की थी। हालांकि, उसके खिलाफ यह आरोप साबित नहीं हो सके थे। यह वारदात 28 सितंबर 2019 को हुई थी।
राजवीर सिंह उर्फ सोनू शाह शहर का नामी प्राॅपर्टी डीलर था। उसके भाई प्रवीण शाह की शिकायत पर केस दर्ज किया था। उसने पुलिस को बताया था कि रोज की तरफ उसका भाई अपने बुड़ैल स्थित अपने दफ्तर में गया। वहां उससे कुछ लोग मिलने आए थे।
प्रवीण ने कहा कि वह ऑफिस के बाहर खड़ा था। तभी उसने देखा कि कुछ लड़के साेनू के ऑफिस में हथियार लेकर घुसे और उन्होंने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। सोनू के सिर और शरीर के कई हिस्सों में गोलियां लगीं।
प्रवीण ने शोर मचाया तो वहां लोग इकट्ठा हो गए। इससे पहले ही शूटर मौका देखकर वहां से फरार हो गए। सोनू शाह को जीएमसीएच-32 ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया था।
इसके बाद पुलिस ने लॉरेंस बिश्ननाई, दीपक रंगा, अभिषेक उर्फ बंटी, राजू बसोदी, धर्मेंद्र, शुभम, मंजीत और राजन उर्फ जाट के खिलाफ केस दर्ज किया था। इनमें से तीनों शूटरों को छोड़कर बाकी पांच आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया था।
बरी होने वालों में दीपक रंगा का नाम कई बड़ी वारदातों में आ चुका है। चार साल पहले पंजाब इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर की मोहाली स्थित बिल्डिंग में हुए आरपीजी अटैक मामले में भी रंगा आरोपित है।
