स्टांप ड्यूटी नोटिफिकेशन होगा भविष्य में लागू….पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में दी जानकारी

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चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में स्पष्ट किया है कि नवंबर 2025 में जारी किया गया स्टांप ड्यूटी से संबंधित नोटिफिकेशन पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं होगा, बल्कि यह केवल भविष्य के संपत्ति लेनदेन (प्रोस्पेक्टिव) पर ही लागू होगा।

इसका मतलब यह है कि पहले से पूरे हो चुके संपत्ति सौदों पर यह नियम लागू नहीं किया जाएगा।

यह मामला उस समय सामने आया था, जब पंजाब IAS/PCS कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों ने सरकार के नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि राज्य सरकार पुराने संपत्ति लेनदेन पर भी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना चाहती है।

मामले की सुनवाई जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ के समक्ष हुई। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मवीर शर्मा ने अदालत को बताया कि विवादित नोटिफिकेशन पूरी तरह से प्रोस्पेक्टिव है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कट-ऑफ डेट को लेकर फैली धारणा सही नहीं है और यह 31 जनवरी नहीं है।

सरकार की ओर से अधिवक्ता अश्वनी पराशर भी पेश हुए। दोनों अधिवक्ताओं को इस मामले के लिए विशेष रूप से पंजाब के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया गया है। अदालत ने राज्य सरकार को संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।

गौरतलब है कि इससे तीन दिन पहले राज्य सरकार ने अदालत से यह स्पष्ट करने के लिए समय मांगा था कि प्रोस्पेक्टिव लागू होने का अर्थ केवल भविष्य में होने वाले शेयर और संपत्ति की बिक्री पर रजिस्ट्रेशन से है या फिर पुराने शेयर ट्रांसफर को भी संपत्ति बिक्री से पहले रजिस्टर कराना होगा।

वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल, उनके साथ अधिवक्ता कुनवाल मुलवानी और सार्थक गुप्ता ने दलील दी कि पंजाब सरकार अवैध रूप से उन संपत्ति सौदों को दोबारा खोलना चाहती है, जो दशकों से चले आ रहे छूट प्रावधानों के तहत पूरी तरह वैध थे।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पंजाब कोऑपरेटिव सोसायटीज़ (संशोधन) अधिनियम, 2025 स्वयं प्रोस्पेक्टिव है, लेकिन सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन पुराने मामलों पर भी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन थोपने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वर्षों पहले प्राप्त वैध संपत्ति अधिकारों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने यह भी दलील दी कि 1948 से लेकर पंजाब कोऑपरेटिव सोसायटीज़ एक्ट, 1961 तक, कोऑपरेटिव सोसायटी के शेयरों से जुड़े दस्तावेजों को स्टांप ड्यूटी और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से छूट प्राप्त थी, ताकि सहकारी आवास आंदोलन को बढ़ावा दिया जा सके।

मामले से जुड़ी सोसायटी ने करीब 70 एकड़ भूमि मूल भू-स्वामियों से खरीदते समय पूरी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क अदा किया था। इसके बाद सदस्यों को प्लॉट शेयर अलॉटमेंट या ट्रांसफर के जरिए दिए गए, जिन्हें उस समय के कानून के तहत रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटीज़ ने मंजूरी दी थी।

हालांकि, यह छूट 3 नवंबर 2025 को अधिसूचित संशोधन अधिनियम के जरिए वापस ले ली गई, जिसमें साफ कहा गया है कि यह कानून “अधिसूचना की तारीख से” लागू होगा, यानी भविष्य के लिए।

इसके बावजूद, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने मौजूदा प्लॉट धारकों को संपत्ति बेचने से पहले अपने नाम पर रजिस्टर्ड सेल डीड करवाने और वर्ष 2025 की कलेक्टर दरों पर स्टांप ड्यूटी चुकाने के लिए बाध्य करने वाले नोटिफिकेशन जारी कर दिए। अब हाईकोर्ट में अगली सुनवाई में राज्य सरकार को इस पूरे मुद्दे पर अपने दस्तावेज और स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

 

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