स्वरोजगार की योजनाओं की जानकारी सभी तक पहुंचाएं: ओम प्रकाश जरयाल

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कार्यशाला में स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दी जानकारी
एएम नाथ।  पालमपुर, 8 जून: उद्योग विभाग द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के रेजिंग एंड एक्सलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैम्प) कार्यक्रम के तहत 6 जून को पालमपुर स्थित एसडीएम कार्यालय में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य एमएसएमई इकाइयों एवं स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल साक्षरता, ब्रांड निर्माण तथा सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया से जोड़ना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ओम प्रकाश जरयाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ऐसी क्षेत्रीय कार्यशालाएं ग्रामीण उद्यमियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं, जैसे मुद्रा ऋण, स्टैंड-अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी योजना तथा मार्केटिंग सहायता कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता, ब्रांड निर्माण तथा जीईएम पोर्टल से जुड़कर स्थानीय उत्पाद न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने उद्यमियों को नियमित रिकॉर्ड रखने, डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने तथा उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि यही आधुनिक व्यवसाय की सफलता की कुंजी है।
ओम प्रकाश जरयाल ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपये तथा सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक के ऋण की सुविधा उपलब्ध है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को 35 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है, जबकि सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को 25 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे इस जानकारी को अपने तक सीमित न रखें, बल्कि अन्य लोगों तक भी पहुंचाएं ताकि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रबंधक सुभाष तथा ईओ हरदीप भी उपस्थित रहे। कार्यशाला का समन्वय रैम्प कार्यक्रम की सलाहकार आकांक्षा शर्मा ने किया।
कार्यशाला में 30 से अधिक एमएसएमई इकाइयों एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें पालमपुर क्षेत्र की महिला उद्यमी एवं सूक्ष्म उद्यमी प्रमुख रूप से शामिल रहीं। कार्यक्रम को तीन सत्रों में आयोजित किया गया।
प्रथम एवं द्वितीय सत्र डिजिटल साक्षरता और ब्रांड निर्माण पर केंद्रित रहे, जिनका संचालन प्रशिक्षक शुभम जमवाल ने किया। प्रतिभागियों को बताया गया कि डिजिटल युग में छोटे व्यवसाय व्हाट्सएप बिजनेस, सोशल मीडिया, यूपीआई भुगतान तथा ऑनलाइन मार्केटिंग टूल्स के माध्यम से अपनी पहचान और बाजार का विस्तार कर सकते हैं। ब्रांड निर्माण के तहत उत्पाद पैकेजिंग, स्टोरीटेलिंग, ग्राहक विश्वास निर्माण तथा स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की व्यावहारिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वित्तीय अनुशासन, रिकॉर्ड प्रबंधन एवं सरकारी ऋण योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।
तृतीय सत्र में जीईएम पोर्टल के सीपीपी मॉड्यूल पर जागरूकता एवं ऑनबोर्डिंग प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस सत्र में अमित कुमार ने प्रतिभागियों को जीईएम पोर्टल की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। विशेषज्ञों ने बताया कि जीईएम पर पंजीकरण के माध्यम से स्वयं सहायता समूह, एमएसएमई इकाइयां एवं स्टार्टअप सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इससे पारदर्शी प्रक्रिया, समयबद्ध भुगतान तथा देशव्यापी बाजार तक पहुंच सुनिश्चित होती है।
सत्र के दौरान ऑन-द-स्पॉट जीईएम पंजीकरण एवं ऑनबोर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। कई महिला उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने मौके पर ही अपनी विक्रेता प्रोफाइल बनाकर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की। तकनीकी टीम ने पंजीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान भी किया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने व्यवसाय को डिजिटल माध्यमों से विस्तार देने तथा सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में भागीदारी सुनिश्चित करने का स्पष्ट मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। रैम्प टीम, कांगड़ा ने विश्वास व्यक्त किया कि पालमपुर की महिला उद्यमी एवं स्वयं सहायता समूह इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त होंगे, जिससे जिले के एमएसएमई क्षेत्र को नई गति और मजबूती मिलेगी।
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