हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहर अब होगी डिजिटल, 17 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण पूरा : उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

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उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री बोले—ऑनलाइन पोर्टल से शोधकर्ताओं और आम जनता को मिलेगी आसान पहुंच

रोहित जसवाल।  शिमला। हिमाचल प्रदेश की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अब डिजिटल माध्यम से संरक्षित किया जाएगा। हिमाचल राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण दस्तावेजों के करीब 17 लाख पृष्ठों का प्रथम चरण में डिजिटलीकरण पूरा कर लिया गया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसे प्रदेश की अमूल्य दस्तावेजी धरोहर के संरक्षण और उसे आमजन व शोधकर्ताओं तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

1807 से अब तक के 30 हजार से अधिक ऐतिहासिक अभिलेख

राज्य अभिलेखागार में वर्ष 1807 से अब तक के 30 हजार से अधिक ऐतिहासिक अभिलेख, दुर्लभ पुस्तकें, गजेटियर, सेटलमेंट रिपोर्ट, पांडुलिपियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित हैं। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों का उपयोग हिमाचल सहित देश-विदेश के शोधकर्ता, इतिहासकार और शिक्षाविद अध्ययन एवं शोध के लिए करते हैं।

दुर्लभ पांडुलिपियों का भी होगा डिजिटल संरक्षण

मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ज्ञान भारतम् मिशन के तहत नेशनल मैनुस्क्रिप्ट सर्वे का कार्य भी जारी है। इसके अंतर्गत प्रदेश में उपलब्ध दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सर्वेक्षण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है।

सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य नेशनल डिजिटाइजेशन ड्राइव के तहत हिमाचल राज्य संग्रहालय, शिमला में स्थापित क्लस्टर सेंटर के माध्यम से किया जा रहा है।

जल्द शुरू होगा डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल रूप में सुरक्षित किए गए अभिलेखों को शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल विकसित किया जाएगा।

विभाग द्वारा तैयार पूरी तरह सर्चेबल डिजिटल डेटा को पोर्टल की होस्टिंग, प्रबंधन, रख-रखाव और भविष्य में अपग्रेड करने के लिए आईटी विभाग को उपलब्ध करवाया जाएगा। यह पोर्टल जल्द ही स्कॉलर्स, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आम जनता को समर्पित किया जाएगा।

शोध और अध्ययन को मिलेगी नई गति

डिजिटल पोर्टल के माध्यम से हिमाचल के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दस्तावेजों तक सुरक्षित, सरल और व्यापक ऑनलाइन पहुंच संभव होगी। इससे शोध, अध्ययन, दस्तावेजीकरण और ऐतिहासिक ज्ञान के प्रसार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि नेशनल मैनुस्क्रिप्ट सर्वे के दौरान चिन्हित दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की डिजिटल प्रतियां भी हिमाचल राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित रखी जाएंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों को उनके विषय से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियां अध्ययन एवं संदर्भ के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के गौरवपूर्ण इतिहास से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप देने की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रदेश की अनमोल विरासत को सुरक्षित रखने का मजबूत माध्यम बनेगी।

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