हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल खत्म : 1 फरवरी से बीडीओ और पंचायत सचिव संभालेंगे पंचायतों की कमान…जाने किन पंचायतों का अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल

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एएम नाथ । शिमला : हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल शनिवार 31 जनवरी को समाप्त हो गया है। इसके साथ ही प्रदेश की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की जिम्मेदारी अब अस्थायी रूप से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी गई है।

राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अनुसार एक फरवरी से पंचायतों की सभी शक्तियां प्रशासकों के पास होंगी।

सरकार की अधिसूचना के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में अधिकांश पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो गया है। हालांकि लाहौल-स्पीति जिले के केलांग उपमंडल की सभी ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों, चंबा जिले के पांगी उपमंडल की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों तथा कुल्लू जिले की चार ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था से फिलहाल बाहर रखा गया है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 लागू होने के कारण समय पर पंचायत चुनाव नहीं हो सके। इसके चलते यह प्रशासनिक व्यवस्था की गई है।

हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1994 के तहत कार्यकाल पूरा होने के बाद इन संस्थाओं को भंग माना गया है। इसके बाद राज्यपाल ने अधिनियम की धारा 140(3)(बी) के अंतर्गत पंचायतों के संचालन के लिए समितियों का गठन किया है। ग्राम पंचायतों में खंड विकास अधिकारी को समिति का अध्यक्ष और पंचायत सचिव को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। पंचायत समितियों के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सामाजिक शिक्षा एवं खंड योजना अधिकारी को सदस्य और पंचायत निरीक्षक या उप निरीक्षक को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। जिला परिषदों के स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अध्यक्ष, जिला विकास अधिकारी को सदस्य और जिला पंचायत अधिकारी को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार से मिलने वाले वित्त आयोग अनुदान के भुगतान के लिए समिति का सदस्य सचिव ‘मेकर’ और समिति का अध्यक्ष ‘चेकर’ की भूमिका निभाएगा, ताकि पंचायतों से जुड़े वित्तीय कार्य बिना किसी रुकावट के चलते रहें।

इसी बीच पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारियां भी जारी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन शुरू कर दिया गया है। शिमला जिला प्रशासन ने पंचायत मतदाता सूची जारी कर दी है। इससे पहले मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं, जिनका नियमानुसार निपटारा किया जा चुका है।

जिला प्रशासन के अनुसार जिन नागरिकों के नाम पंचायत मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें अब भी मौका दिया जा रहा है। ऐसे लोग पंचायत सचिव या खंड विकास अधिकारी कार्यालय में आवेदन कर अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं। पंचायत क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण के लिए दो रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि शहरी निकाय क्षेत्रों में यह शुल्क 50 रुपये रखा गया है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में कुल 3577 पंचायतें हैं और पंचायत क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 55 लाख से अधिक है। नए मतदाता जुड़ने से यह संख्या और बढ़ सकती है। इसके साथ ही प्रदेश की 31 पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया भी चल रही है। इन पंचायतों को मंजूरी मिलने के बाद सूची सार्वजनिक की जाएगी और लोगों से 15 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।

पंचायत चुनाव से जुड़ा मामला इस समय हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अदालत ने राज्य में 30 अप्रैल तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।

इन पंचायतों में अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल : हालांकि प्रदेश के कुल 12 जिला परिषदों में से लाहुल स्पीति जिला परिषद के प्रतिनिधियों, प्रदेश की वर्तमान में 3577 पंचायतों में से 55 पंचायतों के प्रतिनिधियों जिनमें केलंग की 32, पांगी की 19 और कुल्लू की चार पंचायतों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त होगा।
ऐसे में अब प्रदेश में सभी पंचायतों, शहरी निकायों के चुनाव एक साथ अप्रैल में होंगे।

 

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