हिमाचल भवन की कुर्की के आदेश : सुक्खू बोले- कोर्ट का आदेश पढ़ने के बाद लेंगे फैसला

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दिल्ली :  हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दिल्ली में बने हिमाचल भवन को कुर्क करने के आदेश दिए हैं. दिल्ली के मंडी हाउस में स्थित हिमाचल भवन को कुर्क करने के आदेश एक आर्बिट्रेशन अवॉर्ड की अनुपालना सुनिश्चित न करने पर जारी हुए हैं.  हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि उन्होंने अभी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उन आदेशों को नहीं पढ़ा है, जिसमें हाईकोर्ट ने दिल्ली से हिमाचल भवन की कुर्की की बात कही है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इन आदेशों को पढ़ेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आर्बिट्रेशन की मामलों में जिस तरह के आदेश आ रहे हैं, वह चिंताजनक हैं. उन्होंने कहा कि वे फैसले का अध्ययन करने के बाद आगामी कदम उठाएंगे.

मुख्यमंत्री  सुक्खू ने क्या कहा :   अपफ्रंट प्रीमियम एक पॉलिसी के तहत है. साल 2006 में ऊर्जा नीति बनी थी, उस वक्त विद्या स्टोक्स ऊर्जा मंत्री थी. ऊर्जा नीति बनाने वाली कमेटी में मैं भी शामिल थी. पॉलिसी में यह स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट लगे या न लगे, उसका प्रीमियर प्राइस जमा करवाया जाएगा. आर्बिट्रेशन के कई ऐसे फैसले आ रहे हैं, जो चिंताजनक हैं. मैं अध्ययन करने के बाद आगामी कदम उठाऊंगा”.

क्या है पूरा मामला :   साल 2009 में सरकार ने कंपनी को 320 मेगावाट का बिजली प्रोजेक्ट आवंटित किया था. यह प्रोजेक्ट लाहौल स्पीति में लगाया जाना था. सरकार ने उस समय प्रोजेक्ट लगाने को BRO को सड़क निर्माण का काम दिया था. समझौते के मुताबिक सरकार ने कंपनी को ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवानी थी ताकि कंपनी समय पर प्रोजेक्ट का काम शुरू कर सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कंपनी ने साल 2017 में एक रिट याचिका दायर की कंपनी ने कोर्ट को बताया कि सुविधा न मिलने की वजह से कंपनी को प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा और यह प्रोजेक्ट वापस सरकार को दे दिया गया. इस पर सरकार ने अपफ्रंट प्रीमियम जब्त कर लिया. सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने 64 करोड़ के अपफ्रंट प्रीमियम के भुगतान के आदेश जारी किए हैं.

मामले में अगली सुनवाई 6 दिसंबर को :   हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के एमपीपी और पावर विभाग के प्रमुख सचिव को इस बात की जांच करने के लिए भी कहा है कि किसी विशेष अधिकारी या अधिकारियों की गलती की वजह से 64 करोड़ रुपए की 7 फीसदी ब्याज सहित अवार्ड राशि अदालत में जमा नहीं करवाई गई. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 दिन के अंदर जांच पूरी करने के लिए कहा है. साथ ही इसकी रिपोर्ट अगली तारीख को अदालत में पेश करने के लिए भी कहा है. इस मामले पर अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होनी है.

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