हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत सीबीएसई शिक्षकों के टेस्ट मामले में दायर याचिका खारिज

by

एएम नाथ। शिमला : हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने और शिक्षकों का एक नया सब-कैडर बनाने के राज्य सरकार के निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने जॉइंट टीचर्स फ्रंट और अन्य याचिका को खारिज करते हुए सरकार की नीति को वैध ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई स्कूलों में तैनाती के लिए सेवारत शिक्षकों को लिखित परीक्षा और काउंसलिंग प्रक्रिया को तर्कसंगत और पारदर्शी माना गया है।
अदालत ने माना कि राज्य सरकार के पास अनुच्छेद 162 के तहत शिक्षकों का एक समर्पित सब-कैडर बनाने का पूर्ण अधिकार है, ताकि स्कूलों में उत्कृष्टता और निरंतरता बनी रहे।चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी है। अदालत ने कहा कि पैरा 5.5 किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं करता। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार 5 मार्च को आयोजित हुई स्क्रीनिंग परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकेगी। इसके अलावा मेरिट के आधार पर शिक्षकों की काउंसलिंग और तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी।प्रदेश के 134 से अधिक सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी।
याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि यह वर्ग के भीतर वर्ग बनाने जैसा है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह चयन प्रक्रिया स्वैच्छिक है और किसी के सेवा हितों का नुकसान नहीं करती। शिक्षकों के संगठनों ने सरकार की 19 जनवरी 2026 की अधिसूचना के पैरा 5.5 को चुनौती दी थी। उनकी मुख्य दलीलें थी कि पुराने अनुभवी शिक्षकों को नए शिक्षकों के साथ लिखित परीक्षा में बैठाना गलत है। परीक्षा में फेल होने पर शिक्षकों का मनोबल गिरेगा और शैक्षणिक माहौल खराब होगा।शिक्षकों को डर था कि सीबीएसई स्कूलों में जाने से उनके मूल कैडर में पदोन्नति पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि इन शिक्षकों का लियन उनके मूल कैडर में सुरक्षित रहेगा और उनकी वरिष्ठता या पदोन्नति पर कोई आंच नहीं आएगी।
————————
सार्वजनिक हित व्यक्तिगत कठिनाई से ऊपर

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि कुछ शिक्षकों को होने वाली व्यक्तिगत कठिनाई या तबादले का डर, व्यापक सार्वजनिक हित के आड़े नहीं आ सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

मोंटू को मिला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के हल्के में तालमेल बिठाने का जिम्मा

एएम नाथ। सोलन : सोलन के कांग्रेस नेता अमित ठाकुर को नयी जिम्मेवारी मिली है। अब वह प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्ररेणुका में पार्टी कार्यकर्ताओं में तालमेल बिठाने का काम करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष विनय...
article-image
हिमाचल प्रदेश

आईजीएमसी में क्यों नहीं पड़ रहे स्टंट, क्यों नहीं मिल रहा सर्जरी का सामान -व्यवस्था परिर्वतन में क्यों ख़राब है प्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्था की सेहत : जयराम ठाकुर

हिमाचल में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्राथमिकता देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार एएम नाथ। शिमला :  शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम...
article-image
हिमाचल प्रदेश

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अधिकारियों के साथ की वर्चुअल समीक्षा बैठक, शीघ्र पेयजल सप्लाई बहाल करने के दिये निर्देश : मरम्मत और स्कीमों की बहाली में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी कहा उप मुख्यमंत्री ने

शिमला 11 जुलाई – प्रदेश में पेयजल की स्थिति का जायजा लेने के लिए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक में सचिव जल शक्ति अमिताभ अवस्थी,...
article-image
हिमाचल प्रदेश

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

एएम नाथ। धर्मशाला, 9 अगस्त। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव बाली ने आज धर्मशाला के ग्रीन प्लाजा 3 पार्क, नजदीक शहीद स्मारक में पौधारोपण कर एक विशेष वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। जिला विधिक...
Translate »
error: Content is protected !!