कभी औहर स्कूल में चलता था जेबीटी प्रशिक्षण केंद्र, क्षेत्र का है ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान
गत दिनों बच्चों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी
एएम नाथ। घुमारवीं (बिलासपुर) 10 जुलाई: नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला औहर को अगले शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम के अंतर्गत लाया जाएगा ताकि यहां के बच्चों को सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत शिक्षा की सुविधा प्राप्त हो सके। राजेश धर्माणी गत दिनों औहर स्कूल में बच्चों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला औहर क्षेत्र का एक ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस विद्यालय परिसर में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) का प्रशिक्षण केंद्र कार्यरत रहा है, जहां जेबीटी एवं बी.एड. प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता था। बाद में इस परिसर को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के रूप में विकसित किया गया।

उन्होंने कहा कि विद्यालय का भवन काफी पुराना होने के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में विद्यार्थियों को बेहतर एवं आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार ने विद्यालय के भवन के जीर्णाेद्धार एवं नवीनीकरण के लिए 1 करोड़ 32 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। इस राशि से भवन की छत, सीलिंग, फ्लोरिंग, खिड़कियों, दरवाजों, विद्युत व्यवस्था, बरामदों तथा कक्षों का व्यापक नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त छात्र एवं छात्राओं के लिए अलग-अलग आधुनिक शौचालयों का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि उन्हें बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

राजेश धर्माणी ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय के साथ लगते खेल मैदान के चैनेलाइजेशन, रखरखाव तथा बाउंड्री वॉल के निर्माण के लिए भी धनराशि उपलब्ध करवाई गई है ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं बेहतर खेल सुविधाएं सुनिश्चित हो सकें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों में निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी सोच के तहत औहर विद्यालय को सीबीएसई से संबद्ध करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा अपने घर के निकट ही उपलब्ध हो सके।
