1364 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती/धात्री महिलाओं, 6 वर्ष तक के बच्चों को किया जा रहा लाभान्वित

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ऊना, 16 जून – महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों के कल्याणार्थ विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। यह जानकारी कार्यकारी उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने जिला स्तरीय निगरानी एवं समीक्षा की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने बताया कि जिला में 1364 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 माह से 3 वर्ष आयु तक के 18,255, 3 से 6 वर्ष आयु तक के 5,670 बच्चों को विशेष पोषण कार्यक्रम, 5,670 बच्चों को पूर्वशाला शिक्षा तथा 7,243 गर्भवती/धात्री महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है।
घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं का हर माह फाॅलोअप करना सुनिश्चित करें संरक्षण अधिकारी
महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उनके सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के बारे में महिलाओं को जानकारी होनी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा से महिलाओं की रक्षा के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत नियुक्त संरक्षण अधिकारियों को इस अधिनियम के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए तथा अपने कार्यक्षेत्र में घरेलू हिंसा का कोई भी मामला आने पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा से सम्बन्धित जो भी मामला आए हर माह उस मामले का फाॅलो अप सुनिश्चित करें इससे पिडिता का मनोबल भी बढेगा और उसे एहसास होगा कि उसकी सुनवाई हो रही है। और इस प्रकार के मामलों की पुनरावृति भी न हो उन्होंने बताया कि 31 मार्च, 2023 तक घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के 253 मामले प्राप्त हुए जिसमें 170 मामलों में संरक्षण अधिकारियों द्वारा काउंसलिग की गई।
वन स्टोप सेंटर के तहत पीड़ित महिलाओं को प्रदान की जा रही त्वरित सहायता
सभी प्रकार की हिंसा की शिकार महिलाओं को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए जिला में वन स्टोप सेंटर बनाया गया है। जिसके माध्यम से गत वित्तीय वर्ष के दौरान 30 पीड़ित महिलाओं को जरूरी मदद प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिलाओं के लिए मेडिकल जांच व उपचार की व्यवस्था, आपात स्थिति में रहने-खाने की सुविधा, सेंटर में कानूनी सलाह के लिए वकील भी उपलब्धता के साथ-साथ ही पीड़ित महिला एवं बालिका को मनोवैज्ञानिक परामर्श और काउंसिलिंग की सुविधा प्रदान की जाती है। उन्होंने लोगों से आहवान किया है कि किसी भी पीड़ित महिला को वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से सहायता उपलब्ध करवाने हेतु सेंटर को दूरभाष नम्बर 01975 225844 सूचित करें। यह सेंटर 24 घंटे सातों दिन सेवाएं प्रदान करता है।
बैठक में दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, अनैतिक तस्करी अधिनियम 1956 और हिमाचल प्रदेश विवाह पंजीकरण अधिनियम 2006 पर भी विस्तृत चर्चा की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी सतनाम सिंह ने बताया कि सीडीपीओ, सुपरवाईजर और आंगनबाडी कार्यकर्ता सम्बन्धित पंचायतों में इन अधिनियमों के बारे में नियमित रूप से जागरूक कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जिला स्तरीय पोषण समिति की बैठक में विभागीय पोषण कार्यक्रमों के सभी बिन्दुओं की प्रगति के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता शर्मा, उपनिदेशक कृषि विभाग कुलभूषण धीमान, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी आनंदी शैली,एसएवीई एनजीओ से राजेश शर्मा, डाईट देहलां के प्रधानार्चा राकेश अरोड़ा, डाॅ रिचा कालिया, तहसील कल्याण अधिकारी जितेंद्र कुमार, समस्त बीडीओ और सीडीपीओ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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