1464 करोड़ रुपए का GST घोटाला उजागर : कई बोगस कंपनियों का पर्दाफाश, 4 बड़े कारोबारी गिरफ्तार

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स्क्रैप, लोहा और सीमेट की फर्जी बिलिंग के जरिए घोटाला

अब तक 335 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी आई सामने

कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, पंजाब और हिमाचल से जुड़े हैं तार

एएम नाथ। नई दिल्ली/चंडीगढ़। : देश में बड़े टैक्स घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। अफसरों की टीम ने 1464 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग के जरिए सबसे बड़े जीएसटी घोटाले का पर्दाफाश किया है। यह जीएसटी स्कैम कई राज्यों में फैला हुआ बताया जा रहा है। स्क्रैप, स्टील, लोहा और सीमेंट खरीद फरोख्त के फर्जी बिलिंग की गई। इसमें चार कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस नेटवर्क के अन्य कारोबारियों की तलाश की जा रही है। इसके तार उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली औऱ हिमाचल से जुड़े बताए जा रहे हैं।

जीएसटी (GST) घोटाले का पर्दाफाश भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी कनिष्क ने की है। यह जीएसटी घोटाला कर्नाटक में सामने आया है। आईएएस अफसर कनिष्क के नेतृत्व और सतर्क निगरानी में कर्नाटक वाणिज्यिक कर विभाग के प्रवर्तन विंग (दक्षिण क्षेत्र) ने करीब 1464 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय फर्जी बिलिंग रैकेट का खुलासा किया है, यह जीएसटी (GST) स्कैम कई राज्यों में फैला हुआ है। फिलहाल कर्नाटक और बेंगलुरू से चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक यह संगठित गिरोह कर्नाटक और तमिलनाडु में सीमेंट, लोहा, इस्पात और अन्य निर्माण सामग्री के नाम पर फर्जी व्यापार दिखाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी (GST) चोरी को अंजाम दे रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के गलत इस्तेमाल से लगभग 355 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चल चुका है। प्रारंभिक आकलन में यह भी संकेत मिले हैं कि आगे की जांच में कर चोरी की राशि और बढ़ सकती है।
इस पूरे मामले की खास बात यह रही कि फर्जीवाड़े का खुलासा पारंपरिक जांच पद्धतियों के बजाय उन्नत जीएसटी (GST) डेटा विश्लेषण तकनीक के माध्यम से हुआ। कर्नाटक वाणिज्यिक कर विभाग की आंतरिक गैर-वास्तविक करदाता (NGTP) प्रणाली के जरिए संदिग्ध कंपनियों के लेनदेन, आईटीसी दावों के चक्रीय पैटर्न और असामान्य बिलिंग व्यवहार को चिह्नित किया गया। विश्लेषण में यह सामने आया कि कई कंपनियां बिना किसी वास्तविक व्यापार के केवल कागजों पर लेनदेन दिखाकर आईटीसी का लाभ उठा रही थीं।

स्क्रैप, लोहा और सीमेट की फर्जी बिलिंग के जरिए घोटाला

अब तक 335 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी आई सामने

कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, पंजाब और हिमाचल से जुड़े हैं तार

एएम नाथ। नई दिल्ली/चंडीगढ़।

देश में बड़े टैक्स घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। अफसरों की टीम ने 1464 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग के जरिए सबसे बड़े जीएसटी घोटाले का पर्दाफाश किया है। यह जीएसटी स्कैम कई राज्यों में फैला हुआ बताया जा रहा है। स्क्रैप, स्टील, लोहा और सीमेंट खरीद फरोख्त के फर्जी बिलिंग की गई। इसमें चार कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस नेटवर्क के अन्य कारोबारियों की तलाश की जा रही है। इसके तार उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली औऱ हिमाचल से जुड़े बताए जा रहे हैं।
जीएसटी (GST) घोटाले का पर्दाफाश भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी कनिष्क ने की है। यह जीएसटी घोटाला कर्नाटक में सामने आया है। आईएएस अफसर कनिष्क के नेतृत्व और सतर्क निगरानी में कर्नाटक वाणिज्यिक कर विभाग के प्रवर्तन विंग (दक्षिण क्षेत्र) ने करीब 1464 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय फर्जी बिलिंग रैकेट का खुलासा किया है, यह जीएसटी (GST) स्कैम कई राज्यों में फैला हुआ है। फिलहाल कर्नाटक और बेंगलुरू से चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक यह संगठित गिरोह कर्नाटक और तमिलनाडु में सीमेंट, लोहा, इस्पात और अन्य निर्माण सामग्री के नाम पर फर्जी व्यापार दिखाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी (GST) चोरी को अंजाम दे रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के गलत इस्तेमाल से लगभग 355 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चल चुका है। प्रारंभिक आकलन में यह भी संकेत मिले हैं कि आगे की जांच में कर चोरी की राशि और बढ़ सकती है।
इस पूरे मामले की खास बात यह रही कि फर्जीवाड़े का खुलासा पारंपरिक जांच पद्धतियों के बजाय उन्नत जीएसटी (GST) डेटा विश्लेषण तकनीक के माध्यम से हुआ। कर्नाटक वाणिज्यिक कर विभाग की आंतरिक गैर-वास्तविक करदाता (NGTP) प्रणाली के जरिए संदिग्ध कंपनियों के लेनदेन, आईटीसी दावों के चक्रीय पैटर्न और असामान्य बिलिंग व्यवहार को चिह्नित किया गया। विश्लेषण में यह सामने आया कि कई कंपनियां बिना किसी वास्तविक व्यापार के केवल कागजों पर लेनदेन दिखाकर आईटीसी का लाभ उठा रही थीं।

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कई फर्जी कंपनियां सामने आई
इसके साथ ही जांच अधिकारियों ने कंपनियों के आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट का भी गहन विश्लेषण किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अलग-अलग नामों से पंजीकृत कई कंपनियां वास्तव में एक ही नेटवर्क द्वारा संचालित की जा रही थीं। इन तकनीकी संकेतों के आधार पर कर्नाटक और तमिलनाडु के कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया। इस समन्वित कार्रवाई से पूरे रैकेट की संरचना, उसकी कार्यप्रणाली और शामिल लोगों की भूमिका सामने आ गई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने दर्जनों फर्जी कंपनियां खड़ी करने के लिए ऑनलाइन खरीदे गए स्टांप पेपर, फर्जी किरायानामा, मकान मालिकों और किरायेदारों के जाली हस्ताक्षर, मनगढ़ंत कर रसीदें और फर्जी नोटरी सत्यापन जैसे दस्तावेजों का सहारा लिया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी (GST) पंजीकरण हासिल कर नकली चालान तैयार किए जाते थे और सर्कुलर लेनदेन दिखाकर आईटीसी का दावा किया जाता था। पर्याप्त कर लाभ लेने के बाद जांच और ऑडिट से बचने के लिए इन कंपनियों के जीएसटी (GST) पंजीकरण जानबूझकर रद कर दिए जाते थे।
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चार लोगों को किया गिरफ्तार
प्रवर्तन एजेंसियों ने इस मामले में अब तक चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु के दो भाई इरबाज अहमद और नफीज अहमद ने ट्राइऑन ट्रेडर्स, वंडर ट्रेडर्स, रॉयल ट्रेडर्स और गैलेक्सी एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियां बनाईं। वहीं, बेंगलुरु के निवासी एड्डाला प्रताप और रेवती ने पावर स्टील एंड सीमेंट, पीआर कंस्ट्रक्शन, एसवी ट्रेडर्स और एसआरएस सीमेंट स्टील ट्रेडर्स के नाम से फर्जी कारोबार खड़ा किया। चारों आरोपियों को बेंगलुरु स्थित आर्थिक अपराध विशेष न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आईएएस अधिकारी कनिष्क की यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने तकनीक और प्रशासनिक सूझबूझ का बेहतरीन तालमेल दिखाया। उनके पिता देश की प्रतिष्ठित औद्योगिक कंपनी टाटा स्टील में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और कनिष्क की प्रारंभिक शिक्षा जमशेदपुर में हुई है। झारखंड से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे कनिष्क की इस उपलब्धि को प्रदेश में प्रशासनिक सेवा के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।


घोटाले का पर्दाफाश करने वाला आईएएस कनिष्क

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