चंबा में लापरवाही का मामला: पेट में छूटी सर्जिकल सामग्री निकालने के लिए हुई दूसरी सर्जरी
गॉसिपिबोमा मामले में डॉक्टरों को मुआवजे का आदेश, 9% ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी
एएम नाथ। चंबा : पेट के ऑपरेशन के करीब एक साल बाद तेज दर्द की शिकायत और जांच में शरीर के अंदर सर्जिकल सामग्री मिलने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंबा ने दो चिकित्सकों को 5,12,026 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने शिकायत की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं। दोनों चिकित्सकों को यह राशि संयुक्त और पृथक रूप से चुकानी होगी।
मामला डलहौजी तहसील के दुहका निवासी राकेश कुमार से जुड़ा है। 29 जुलाई 2019 को पेट दर्द की शिकायत पर उन्हें मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, बद्दी में भर्ती कराया गया था। जांच में पित्ताशय में पथरी पाई गई, जिसके बाद उनका ऑपरेशन किया गया। 3 अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। शुरुआत में उनकी स्थिति सामान्य रही।
करीब एक साल बाद सितंबर 2020 में राकेश कुमार को फिर तेज पेट दर्द होने लगा। समस्या बढ़ने पर उन्होंने जांच करवाई। 13 सितंबर 2020 को चंडीगढ़ में कराए गए सीईसीटी स्कैन में पित्ताशय के नीचे करीब 8×8 सेंटीमीटर का संग्रह दिखाई दिया। रिपोर्ट में इसके भीतर हवा के छोटे बिंदुओं के साथ टांके से जुड़ी सामग्री भी नजर आई।
इसके बाद पठानकोट में अल्ट्रासाउंड कराया गया। जांच के बाद ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री के शरीर के अंदर रह जाने की आशंका जताई गई। राकेश कुमार ने पंचकूला के धवन अस्पताल में उपचार कराया, जहां 1 अक्तूबर पहली सर्जरी से जुड़े चिकित्सकीय उपचार को लेकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद माना कि सर्जरी के दौरान इस्तेमाल सामग्री का शरीर के अंदर रह जाना स्वीकार ने कुल 6,52,026 रुपये का दावा किया था। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और मामले के तथ्यों के आधार पर 5,12,026 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया। आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर ने र्जरी के दौरान इस्तेमाल हुई गॉज या अन्य सामग्री गलती से शरीर के अंदर रह जाती है। इसके कारण बाद2020 को दोबारा सर्जरी कर पेट के अंदर मौजूद विदेशी सामग्री निकाली गई।
इसके बाद उन्होंने पहली सर्जरी से जुड़े चिकित्सकीय उपचार को लेकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद माना कि सर्जरी के दौरान इस्तेमाल सामग्री का शरीर के अंदर रह जाना स्वीकार्य चिकित्सा मानकों के अनुरूप नहीं था। आयोग ने इसे सेवा में कमी और चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला माना।
राकेश कुमार ने कुल 6,52,026 रुपये का दावा किया था। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और मामले के तथ्यों के आधार पर 5,12,026 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया। आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर ने 24 सितंबर 2026 को आदेश सुनाया।
गॉसिपिबोमा उस स्थिति को कहा जाता है, जब सर्जरी के दौरान इस्तेमाल हुई गॉज या अन्य सामग्री गलती से शरीर के अंदर रह जाती है। इसके कारण बाद में गांठ, सूजन, संक्रमण या दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
