40 Km. तक आने-जाने पर टोल फ्री, NHAI का बड़ा फैसला, पढ़ें नए सिस्टम के नए नियम

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ई दिल्ली: देशभर के एक्सप्रेसवे पर वाहनों से सैटलाइट आधारित टोल  वसूली प्रणाली लागू करने पर तेजी से काम हो रहा है। आइए, जानते हैं इस नए सिस्टम के नियम और इससे लोगों को मिलने वाले फायदे।

किन गाड़ियों को मिलेगा फायदा? NHAI अधिकारियों के अनुसार, GNSS टोल सिस्टम की शुरुआत केवल कमर्शल गाड़ियों पर की जाएगी। पहले चरण में चार करोड़ से अधिक कमर्शल गाड़ियों को शामिल किया जाएगा, जबकि फिलहाल प्राइवेट गाड़ियां इस सिस्टम से बाहर रहेंगी। कमर्शल वाहनों में आमतौर पर कंपनी द्वारा ऑनबोर्ड GNSS डिवाइस (IS 140) पहले से लगी होती है। जिन वाहनों में यह डिवाइस नहीं है, उनके लिए मार्केट में उपलब्ध विकल्पों से इसे लगवाया जा सकता है।

40 किमी तक टोल फ्री नए नियमों के तहत, देश के किसी भी टोल वाले हाइवे या एक्सप्रेसवे पर रोजाना 20 किमी की दूरी तक आने-जाने पर कोई टोल टैक्स नहीं लगेगा, यानी 40 किमी का सफर टोल फ्री होगा। यदि कोई वाहन 21 किमी की दूरी तय करता है, तो उसे पूरे 21 किमी का टोल देना होगा।

कहां हुआ ट्रायल? जुलाई में सरकार ने कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर GNSS आधारित टोल सिस्टम का ट्रायल शुरू किया था। इसमें कर्नाटक के NH-275 (बेंगलुरु-मैसूर) और हरियाणा के NH-709 (पानीपत-हिसार) मार्गों पर इसका पायलट प्रोजेक्ट किया गया था। फिलहाल यह तय नहीं है कि नया नियम कब और कहां लागू होगा, लेकिन इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

पूरे देश में कैसे होगा लागू? सैटलाइट आधारित इस सिस्टम को देशभर में लागू करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। GNSS सिस्टम लागू होने के बाद, चाहे वाहन स्थानीय हो या अन्य किसी क्षेत्र से, यदि वह 20 किमी से कम की यात्रा करता है, तो उससे टोल नहीं लिया जाएगा।

GNSS और नॉन-GNSS गाड़ियों के लिए अलग लाइनें जब तक पूरे देश में GNSS आधारित टोल सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा टोल प्लाजा ऐसे ही काम करते रहेंगे। जिन गाड़ियों में GNSS डिवाइस लगी होगी, उनके लिए टोल प्लाजा पर अलग लाइन होगी, जिससे वे बिना रुके गुजर सकेंगी। अगर किसी नॉन-GNSS गाड़ी ने गलती से GNSS लाइन का इस्तेमाल किया, तो उससे डबल टोल वसूला जाएगा, क्योंकि इससे अन्य गाड़ी वालों को देरी होगी।

हाईवे पर टोल संग्रह की प्रक्रिया पूरी तरह से बदल जाएगी जीएनएसएस (सैटेलाइट टोलिंग सिस्टम) लागू होने के बाद हाईवे पर टोल संग्रह की प्रक्रिया पूरी तरह से बदल जाएगी। आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:

टोल गेट की जगह प्रवेश बिंदु: जीएनएसएस सिस्टम लागू होने पर जैसे ही वाहन हाईवे पर प्रवेश करेगा, वहीं से टोल मीटर चालू हो जाएगा। स्थानीय लोगों को 20 किमी तक बिना टोल के यात्रा की अनुमति होगी, लेकिन 21वें किलोमीटर से टोल की गणना शुरू हो जाएगी।

जीएनएसएस डेडिकेटेड लेन: हर टोल प्लाजा पर कुछ विशेष लेन जीएनएसएस से सुसज्जित गाड़ियों के लिए ही आरक्षित होंगी, जिससे इन गाड़ियों को बिना रुके गुजरने की सुविधा मिलेगी।

जीएनएसएस ऑनबोर्ड यूनिट (OBU): इस नए सिस्टम के लिए सभी गाड़ियों में OBU डिवाइस का होना अनिवार्य है। यह डिवाइस वर्तमान में उन्हीं नई गाड़ियों में उपलब्ध है, जिनमें इमरजेंसी हेल्प के लिए पैनिक बटन लगा होता है। अन्य गाड़ियों में इस यूनिट को लगवाना होगा।

फास्टैग की तरह काम करेगा OBU: OBU डिवाइस को सरकारी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा और यह बैंक खाते से लिंक होगा, जिससे टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा।

खर्च: गाड़ियों में OBU लगवाने का खर्च करीब 4,000 रुपये होगा, जिसे वाहन मालिक को वहन करना पड़ेगा।

टोल बूथ हटेंगे: जब सभी गाड़ियों में जीएनएसएस यूनिट लग जाएगी और टोल प्लाजा की सभी लेन जीएनएसएस के लिए समर्पित हो जाएंगी, तो सड़कों से सभी टोल बूथ हटा दिए जाएंगे।

टोल राजस्व: वर्तमान में एनएचएआई को सालाना लगभग 40,000 करोड़ रुपये का टोल राजस्व मिलता है। नई प्रणाली पूरी तरह लागू होने के बाद यह बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

टेंडर प्रक्रिया: जीएनएसएस को लागू करने के लिए पहले एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट आमंत्रित किए गए थे। अब इन्हीं आवेदनों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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