5 हेक्टेयर वन भूमि में रोपित किए 5,500 फलदार व औषधीय पौधे, जैव विविधता को मिली मजबूती

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मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना से घुमारवीं के मरयाणी क्षेत्र में पर्यावरण हुआ संरक्षित
स्थानीय समूह की 6 महिलाएं कर रही हैं जंगल की देखरेख, प्राकृतिक संसाधनों के प्रति बढ़ी है जागरूकता
एएम नाथ। बिलासपुर, 13 फरवरी: बिलासपुर वन मंडल के अंतर्गत भराड़ी वन रेंज की मरयाणी बीट में मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना के तहत पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। इस योजना के माध्यम से लगभग 5 हेक्टेयर वन भूमि पर 5,500 फलदार तथा औषधीय पौधे सफलतापूर्वक रोपित किए गए हैं। कभी आगजनी और पेड़ों की कमी से प्रभावित रहा यह क्षेत्र अब पुनः हरे-भरे वन क्षेत्र में परिवर्तित होने लगा है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता को भी सुदृढ़ कर रही है।
मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना के अंतर्गत पौधरोपण से पूर्व इस क्षेत्र में वृक्षों की संख्या अत्यंत कम थी तथा जंगल में लगी आग के कारण अधिकांश पेड़-पौधे नष्ट हो चुके थे। इसके परिणामस्वरूप पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था तथा मिट्टी कटाव जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो गई थीं। ऐसे में यह योजना क्षेत्र के लिए नई आशा बनकर सामने आई। योजना के तहत 5 हेक्टेयर क्षेत्र में आंवला, हरड़, बहेड़ा, अर्जुन, कचनार, शीशम और खैर सहित विभिन्न फलदार एवं औषधीय प्रजातियों के पौधे रोपित किए गए। इन पौधों के विकसित होने से क्षेत्र की जलवायु में सकारात्मक परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है तथा स्थानीय जैव विविधता को भी मजबूती मिल रही है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रोपित पौधों की सुरक्षा के लिए मजबूत बाड़बंदी की गई है। साथ ही वर्षा जल संरक्षण के उद्देश्य से ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इन ट्रेंचों में वर्षा का जल एकत्रित होकर धीरे-धीरे भूमि में रिसता है, जिससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है। इससे पौधों की वृद्धि दर में वृद्धि हुई है तथा उन्हें सूखे से भी संरक्षण मिला है। अधिकारियों के अनुसार ट्रेंच निर्माण के कारण पौधों में सूखेपन की समस्या लगभग समाप्त हो गई है और सभी पौधे स्वस्थ अवस्था में विकसित हो रहे हैं।
यह योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार सृजन की दिशा में भी प्रभावी सिद्ध हो रही है। स्थानीय महिला समूह को पौधों की देखरेख, निराई-गुड़ाई तथा कटाई-छंटाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समूह की प्रधान मीरा देवी सहित कुल छह महिलाएं प्रतिदिन पौधों की नियमित देखभाल कर रही हैं तथा उन्हें समय-समय पर पारिश्रमिक भी मिल रहा है।May be an image of grass and body of water
समूह की प्रधान मीरा देवी का कहना है कि इस योजना ने उन्हें न केवल अस्थाई रोजगार प्रदान किया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का अवसर भी मिला है। इससे प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उनकी जागरूकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनका विश्वास है कि आगामी 3 से 4 वर्षों में रोपित अधिकांश पौधे पूर्ण विकसित होकर घने वन का स्वरूप ग्रहण कर लेंगे, जिससे क्षेत्र की जलवायु, जल स्रोतों की स्थिरता तथा जैव विविधता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी:
वन मंडलाधिकारी बिलासपुर, राजीव कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में वन मंडल बिलासपुर के भराड़ी एवं सदर वन परिक्षेत्र में कुल 15 हेक्टेयर वन भूमि पर विभिन्न प्रजातियों के 16,500 पौधे रोपित किए गए हैं। इन पौधों के रोपण एवं संरक्षण पर लगभग 10 लाख रुपये की राशि व्यय की जा रही है।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार की विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ क्रियान्वित करने का कार्य किया जा रहा है ताकि संबंधित योजनाओं के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना को सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वन विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत रोपित पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत सुखद एवं प्रेरणादायक है।
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