गिरफ्तारी के वक्त कहा था- ‘ऑल इज वेल… न्यू चैप्टर ऑफ लाइफ इज स्टार्टेड’; रिमांड में मोबाइल, कॉन्टैक्ट्स और संभावित बिचौलियों की जांच
मोगा। 50 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार थाना कोट ईसे खां की एसएचओ इंस्पेक्टर सुनीता बावा बुधवार को सिविल कोर्ट में पेश हुईं। पेशी के दौरान वह मुंह ढककर अदालत परिसर पहुंचीं और रिमांड के बाद मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। कोर्ट से बाहर निकलने के बाद वह सीधे सरकारी वाहन में बैठ गईं।
गिरफ्तारी के समय हालांकि सुनीता बावा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था, ‘ऑल इज वेल… न्यू चैप्टर ऑफ लाइफ इज स्टार्टेड।’ विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। अब जांच एजेंसी रिश्वत प्रकरण से जुड़े मोबाइल फोन, संपर्कों, संभावित बिचौलियों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
26 सितंबर की रात 50 हजार लेते गिरफ्तारी
विजिलेंस के मुताबिक नूरपुर हकीमा निवासी बलवंत सिंह की शिकायत पर ट्रैप लगाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे रिश्वत मांगी जा रही है।
विजिलेंस ने 26 सितंबर की रात जीरा रोड पर तय स्थान पर गवाहों की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर सुनीता बावा और उनके सरकारी गनमैन होमगार्ड जवान गुरअवतार सिंह को कथित तौर पर 50 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था।
रिमांड में मोबाइल और संपर्कों की जांच
विजिलेंस जांच में अब दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन और संपर्कों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तारी से पहले किन नंबरों पर लगातार बातचीत हुई थी।
फोन में मौजूद अथवा डिलीट किए गए मैसेज, चैट और ऑनलाइन लेन-देन से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस यह भी पता लगाने में जुटी है कि मामला केवल शिकायतकर्ता तक सीमित था या इसमें अन्य लोगों की भी कोई भूमिका थी।
संभावित बिचौलियों पर भी नजर
जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि पुलिस विभाग अथवा बाहर का कोई व्यक्ति कथित तौर पर बिचौलिये की भूमिका तो नहीं निभा रहा था। ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जिनके माध्यम से मामलों को निपटाने, समझौता करवाने या आरोपों से बचाने के नाम पर संपर्क किया जाता हो।
इसके अलावा सुनीता बावा और उनके परिवार से संबंधित संपत्तियों के रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। इसमें मकान, प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियों समेत उपलब्ध रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल है।
गिरफ्तारी के बाद पुराना मामला भी चर्चा में
सुनीता बावा की गिरफ्तारी के बाद एक पुराने मामले से संबंधित दस्तावेज भी चर्चा में आए हैं। इसमें एक युवती से जुड़े मामले की जांच और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए थे।
दस्तावेज के अनुसार युवती की मां के बयान पर कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बाद में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर सुखदीप सिंह भंम और महिंदरपाल लूंबा को भी आरोपी बनाया गया। दस्तावेज में जांच के दौरान यह सवाल उठाया गया कि वीडियो की पर्याप्त पड़ताल किए बिना दोनों को मामले में नामजद किया गया।
बाद की जांच में महिंदरपाल लूंबा द्वारा वीडियो नशे के खिलाफ जागरूकता के उद्देश्य से पोस्ट किए जाने की बात सामने आने का उल्लेख दस्तावेज में है। इसमें यह भी कहा गया है कि दोनों 28 जनवरी 2025 को युवती को नशा मुक्ति केंद्र लेकर गए थे। जांच में दोनों को निर्दोष पाए जाने और अदालत से डिस्चार्ज कराने की सिफारिश का भी उल्लेख है।
सुनीता बावा समेत विभागीय कार्रवाई की सिफारिश का उल्लेख
दस्तावेज के मुताबिक 28 जनवरी को महिंदरपाल लूंबा, सुखदीप सिंह भंम और अन्य लोग युवती को थाने लेकर पहुंचे थे, लेकिन उस दिन मामला दर्ज नहीं हुआ। बाद में पंजाब राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पत्र और युवती के बयान के बाद 18 फरवरी 2025 को केस दर्ज किया गया।
इस मामले की जांच इंस्पेक्टर कुलविंदर कौर ने की थी। दस्तावेज में जांच पर आपत्तियां दर्ज करते हुए एसएसपी मोगा को कुलविंदर कौर और सुनीता बावा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश किए जाने का उल्लेख है।
विभागीय कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं
दस्तावेज में कार्रवाई की सिफारिश का उल्लेख होने के बावजूद उसके बाद विभागीय स्तर पर क्या निर्णय लिया गया, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस पुराने मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
फिलहाल रिश्वत प्रकरण में विजिलेंस की जांच जारी है और रिमांड के दौरान जुटाए जा रहे डिजिटल तथा अन्य साक्ष्यों से मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
