587 लोगों की टीम : GPS से ट्रैकिंग, पहली बार हो रही पहाड़ी गायों की गणना

by

मंडी. हिमाचल प्रदेश में पहली बार पहाड़ी गायों की अलग से गणना की जा रही है. इससे पहले, प्रदेश में कभी भी पहाड़ी गायों की गणना नहीं की गई है और इसी कारण प्रदेश सरकार के पास इस बात को लेकर कोई डाटा मौजूद नहीं है कि प्रदेश में पहाड़ी गायों की संख्या कितनी है. अब 21वीं पशु गणना में पहाड़ी गायों की गिनती के लिए अलग से प्रावधान किया गया है.

दरअसल, 1 सितंबर से देश भर में 21वीं पशु गणना का काम चला चल रहा है. जो कि 31 दिसंबर तक पूरा होगा. इस बार की पशु गणना की खास बात यह है कि पहली बार विशेष रूप से पहाड़ी गायों का डाटा अलग से तैयार किया जा रहा है. इससे पहले गाय में सिर्फ देसी और विदेशी नस्लें ही काउंट की जाती थी लेकिन इस बार पहाड़ी गाय की नस्ल का डाटा अलग से बनाया जा रहा है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि पूरे प्रदेश में पहाड़ी गायों की संख्या कितनी हैं. इसके अलावा गाय, भैंस, भेड़, बकरी, कुत्ते और अन्य प्रकार के सभी पशुओं और जानवरों की गणना की जा रही है. जो आवारा पशु और कुत्ते हैं उनकी भी गणना की जा रही है ताकि यह डाटा भी एकत्रित किया जा सके कि इनकी संख्या कितनी है.

पशु पालन विभाग जिला मंडी के उपनिदेशक डा. अतुल पुरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार नस्ल विशेष की गणना को प्रमुखता दी गई है ताकि हर नस्ल का अलग से डाटा तैयार किया जा सके। पहाड़ी गायों को पहली बार अलग नस्ल में शामिल किया गया है जिससे उनका पूरा डाटा एकत्रित होगा। इस गणना के बाद जो डाटा तैयार होगा फिर भविष्य में उसी के तहत सरकार द्वारा पहाड़ी गायों के लिए विशेष प्रकार की योजनाएं बनाई जाएंगी.

मंडी में पशु पालन विभाग डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अतुल पुरी :  मंडी में पशु पालन विभाग डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अतुल पुरी ने बताया कि पहाड़ी गाय के अलावा अन्य पशुओं की भी जो स्थानीय नस्लें होंगी उनका डाटा भी अलग से बनाया जाएगा. इसके लिए गणना में इस बार विशेष प्रावधान किया गया है. डॉ. पुरी ने बताया कि इस बार की गणना जीपीएस आधारित हो रही है और इसलिए इस बात की कोई शंका शेष नहीं रहेगी कि पशुओं की गणना मौके पर जाकर नहीं की गई है.

करीब 587 लोगों की टीम :  जीपीएस के तहत गणना के लिए जाने वाली हर टीम की लोकेशन ट्रैक की जा रही है और मौके से ही यह सारा डाटा एकत्रित किया जा रहा है. इस बार की गणना से स्टीक आंकड़े आएंगे. इस कार्य के लिए पशु पालन विभाग ने जिला भर में 65 सुपरिवाइजर और 522 फार्मासिस्टों को तैनात किया है, जो घर-घर जाकर पशु गणना का कार्य कर रहे हैं. यह कार्य 31 दिसंबर तक हर हाल में पूरा किया जाएगा.

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

 देहरा विस क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का त्वरित निदान होगा सुनिश्चित – ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए उठाएंगे कारगर कदम: कमलेश

नवनिर्वाचित विधायक का ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत राकेश शर्मा । देहरा/तलवाड़ा :   देहरा की नवनिर्वाचित विधायक कमलेश ठाकुर ने कहा कि देहरा विस के ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जाएगा इस...
article-image
हिमाचल प्रदेश

85 लाख रुपये की राहत राशि आपदा प्रभावित परिवारों को दी जा चुकी : तेजी से करवाए जा रहे हैं मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्य: हेमराज बैरवा

हमीरपुर 12 सितंबर। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि पिछले महीने जिले भर में अत्यधिक बारिश, भूस्खलन, जमीन धंसने और बाढ़ से हुए भारी नुक्सान के बाद पुनर्वास, पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्य तेजी से...
article-image
हिमाचल प्रदेश

परशुराम जयंती पर भटियात में भव्य आयोजन : विधानसभा अध्यक्ष ने किया भूमि पूजन, हुनेरा में परशुराम वाटिका विकसित होगी, 5 लाख की घोषणा

सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों पर चला संदेश, क्षेत्रीय विकास पर भी जोर एएम नाथ। चुवाड़ी (चंबा) : भटियात क्षेत्र में श्री परशुराम जयंती के अवसर पर ब्राह्मण कल्याण परिषद द्वारा गरनोटा और हुनेरा...
article-image
हिमाचल प्रदेश

15 मामलों में जारी की 1 लाख 67 हज़ार की राहत राशि : जतिन लाल

जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित रोहित जसवाल। ऊना, 28 मार्च। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति के लोगों को समाज में समानता का अधिकार दिलाने, जातिगत भेदभाव...
Translate »
error: Content is protected !!