कोलकाता, 8 सितंबर: पश्चिम बंगाल में बाल विवाह और नाबालिग गर्भधारण को लेकर सामने आए नए आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से जून 2026 के बीच राज्य के अस्पतालों में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की करीब 60 हजार डिलीवरी दर्ज की गईं। इन आंकड़ों ने बाल सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद से सामने आए हैं, जहां छह महीने के दौरान 12,847 अंडरएज डिलीवरी दर्ज की गईं। यह राज्य में सामने आए कुल मामलों का लगभग पांचवां हिस्सा है। इसके बाद साउथ 24 परगना में 4,178 और पूर्व बर्धमान में 3,777 मामले दर्ज किए गए।
15 साल से कम उम्र की लड़कियों के मामले भी चिंता का विषय
आंकड़ों में 15 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की डिलीवरी के मामले भी सामने आए हैं। मुर्शिदाबाद में ऐसे 253 मामले, रामपुरहाट में 86, मालदा में 81, पूर्व बर्धमान में 77 और उत्तर दिनाजपुर में 75 मामले दर्ज किए गए। पश्चिम मेदिनीपुर में 63 तथा साउथ 24 परगना में 59 ऐसे मामले सामने आए।
इतनी कम उम्र में गर्भधारण को लेकर बाल अधिकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि गर्भावस्था के पीछे बाल विवाह, यौन शोषण या कोई अन्य परिस्थिति तो नहीं थी।
सरकार घर-घर जाकर करेगी जांच
सरकार ने अब ऐसे मामलों की पहचान और जांच के लिए अभियान तेज करने की बात कही है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड खंगालकर संदिग्ध मामलों की पहचान की जाएगी और संबंधित लड़कियों की उम्र तथा परिस्थितियों की जांच की जाएगी।
सरकार की योजना के तहत नाबालिग लड़कियों के पति को नोटिस जारी कर उम्र से संबंधित दस्तावेज मांगे जाने की बात कही गई है। जांच में बाल विवाह की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बाल विवाह कराने वालों पर भी कार्रवाई
सरकार का कहना है कि बाल विवाह कराने, उसमें मदद करने या नाबालिग की शादी के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मामलों की परिस्थितियों के आधार पर बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मुर्शिदाबाद के आंकड़े सबसे ज्यादा
छह महीने में 12,847 अंडरएज डिलीवरी के साथ मुर्शिदाबाद सबसे ऊपर है। हालांकि, किसी जिले में अस्पतालों में ज्यादा डिलीवरी दर्ज होने का मतलब यह सीधे तौर पर नहीं है कि वहां बाल विवाह की दर भी उतनी ही अधिक है।
आबादी, अस्पतालों तक पहुंच, संस्थागत प्रसव की स्थिति और रिकॉर्डिंग व्यवस्था जैसे कई कारक इन आंकड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इन आंकड़ों को बाल विवाह की सीधी दर के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। फिर भी, प्रशासन के लिए ये आंकड़े ऐसे मामलों की पहचान और जांच का महत्वपूर्ण संकेत जरूर हैं।
पहले से बाल विवाह की चुनौती
पश्चिम बंगाल में बाल विवाह लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। राज्य सरकार के दस्तावेजों में एनएफएचएस-5 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 41.6 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हुई थी।
ऐसे में 2026 के पहले छह महीनों में सामने आए अस्पताल-आधारित आंकड़ों ने एक बार फिर बाल विवाह और किशोर गर्भधारण की समस्या पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।
महत्वपूर्ण बात: अस्पतालों में दर्ज करीब 60 हजार अंडरएज डिलीवरी को सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल में बाल विवाह या किशोर गर्भधारण की कुल दर नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति समझने के लिए उम्र, आबादी, गर्भधारण की दर और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग पद्धति समेत अन्य आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी होगा।
