72 घंटे में 20 लाख के ऋण स्वीकृत करने का आरोप : अधिवक्ता ने फॉरेंसिक ऑडिट की उठाई मांग….जोगिन्द्रा बैंक के अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, नाबार्ड से सतर्कता जांच की 

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जेसीसीबी सोलन के प्रबंधन पर गंभीर सवाल, शिकायतकर्ता ने नाबार्ड के सीवीओ को भेजी विस्तृत शिकायत

एएम नाथ। चंडीगढ़/सोलन :  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने जोगिन्द्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (जेसीसीबी), सोलन के प्रबंधन एवं कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध बैंकिंग नियमों के कथित उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए नाबार्ड, मुंबई के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में स्वतंत्र सतर्कता जांच और फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार तत्कालीन अर्की शाखा प्रबंधक सचिन पाल द्वारा ऋण खाता संख्या 100118003100096 एवं 100118003100097 के माध्यम से एक ही व्यक्ति को 10-10 लाख रुपये के दो व्यक्तिगत ऋण, कुल 20 लाख रुपये, मात्र 72 घंटे के भीतर स्वीकृत और वितरित किए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 10 और 11 सितंबर 2022 को बैंक अवकाश होने के बावजूद इतनी कम अवधि में ऋण मूल्यांकन, दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किया जाना गंभीर संदेह पैदा करता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ऋण शाखा के परिचालन क्षेत्र से बाहर स्वीकृत किए गए, संबंधित कुनिहार शाखा से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) नहीं लिया गया तथा उधारकर्ता की वित्तीय क्षमता और सिबिल स्कोर का समुचित परीक्षण भी नहीं किया गया। इसके अलावा बैंक एवं नियामकीय दिशानिर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने यह भी आरोप लगाया है कि इन कथित अनियमितताओं के बावजूद बैंक प्रबंधन ने संबंधित अधिकारी सचिन पाल को संरक्षण दिया। शिकायत में वर्तमान एजीएम राम पॉल का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाए गए तथा स्टाफ योजना के तहत निर्धारित सीमा से अधिक क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराई गई। इन मामलों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 12 मार्च 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कथित उल्लंघन के संबंध में जेसीसीबी लिमिटेड, सोलन पर एक लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध व्यक्तिगत स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायत में नाबार्ड से दोनों ऋण खातों की स्वतंत्र सतर्कता जांच, मूल अभिलेखों एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, फॉरेंसिक ऑडिट कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय, दीवानी और आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी पूर्व शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए उन्होंने मामले की जांच सीधे नाबार्ड के मुख्य सतर्कता अधिकारी से कराने का अनुरोध किया है।

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