800 करोड़ की साइबर ठगी का मामला: कंबोडिया से चल रहा था रैकेट, ऐप बनाकर करते थे मनी लॉन्ड्रिंग

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जालंधर। देशभर में करोड़ों की साइबर ठगी करने के सरगना कंबोडिया में बैठे है, जिन्होंने वर्ष 2024 में 17 हजार फर्जी बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कर 800 करोड़ से अधिक का चूना भारत वासियों को लगाया।

कंबोडिया बैठे सरगनों के एजेंट नेटवर्क बिजनेस का बहाना बना लोगों को पैसों का लालच देकर उनका अकाउंट खुद चलाने लगते है।

ठगी के इस सिस्टम को चलाने के लिए टेलीग्राम ग्रुप बना अकाउंट संचालक को जोड़ा जाता है और ऐसे ही हजारों अकाउंट में साइबर ठगी से निकाला पैसा पहुंच जाता है। जिसके बाद ये पैसा कंबोडिया बैठे सरगनों तक पहुंचता है।

साइबर क्राइम से हो रही मनी लाड्रिंग के तार कंबोडिया ही नहीं चाइना तक फैले है। साइबर क्राइम पुलिस पंजाब के एसपी जशन गिल ने कहा मनी लाड्रिंग का ये पैसा देश विरोधी गतिविधियों में भी इस्तेमाल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इंडियन साइबर क्राइम को-आर्डीनेशन सेंटर ने वर्ष 2024 में पंजाब में खुले 5836 फर्जी बैंक अकाउंट का डाटा दिया तो जांच में इस ठगी नेटवर्क के तार विदेशों तक निकले। फिलहाल ऐसी ठगी को रोकने के लिए साइबर क्राइम पुलिस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को इंटरनेट बैंकिंग की लिमिट कम करने का अनुरोध कर रही है।

ताकि अधिक पैसे की जरूरत पर उपभोक्ता खुद बैंक से पैसे निकलवाए। पंजाब ग्रामीण बैंक में इंटरनेट बैंकिंग से पैसा निकालने की सबसे अधिक पांच लाख तक की लिमिट है। यही वजह है कि इस बैंक के एक साथ 306 अकाउंट्स पर एफआईआर दर्ज की गई है।

टेलीग्राम ग्रुप से बनती शाखाएं

पैसा कमाने का लालच देकर ठग आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों का इस्तेमाल करते है। पहले उनका नया बैंक अकाउंट खुलवाया जाता है या जिसके पास अकाउंट है इसे इंटरनेट बैंकिंग से जोड़ा जाता है। जिसका कंट्रोल ठग अपने पास रखते है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए उनको कंबोडिया बैठे सरगना के साथ जोड़ा जाता। ऐसे ग्रुपों में बैंक अकाउंट होल्डर, कंबोडिया का सरगना और खाता खुलवाने वाला एजेंट केवल तीन सदस्य ही होते है।

इंग्लिश न आने की सूरत में एक अनुवादक को भी ग्रुप में शामिल किया जाता है ताकि वो दोनों तरफ की बातचीत का अनुवाद कर सके। फिर अगले ही दिन अकाउंट में 100-150 रुपये की ट्रांजेक्शन की शुरूआत हो जाती है। विश्वास होने पर उसके अकाउंट से लेन-देन की सीमा बढ़ाते है जो आगे जाकर लाखों तक हो जाती है।

शुरुआती लेन देने में एक खाताधारक रोजाना तीस हजार बना लेता है। ये सारा पैसा साइबर के जरिए लोगों के अकाउंट से निकाला होता है। अकाउंट होल्डर को पता चल जाता है लेकिन पैसों के लालच में वो साइबर ठगी का हिस्सा बन जाता है।

साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल हुए जिन बैंक अकाउंट्स की जांच की गई उनका लिंक कंबोडिया से निकला। सबसे पहले ठगी का पैसा जिस अकाउंट में आया उसे फर्स्ट लेयर कहा जाता है यहीं से अलग-अलग अकाउंट्स में पैसा बांटा गया। जो पांच से सात लेयर लांघ कर कंबोडिया के मुख्य सरगनों तक पहुंचा है। मनी लाड्रिंग का ये पैसा कहीं भी इस्तेमाल हो सकता है। साइबर ठगी का पैसा चाइना तक पहुंचता है। दो देश विरोधी गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। साइबर क्राइम पुलिस पंजाब ठगी के नेटवर्क की जड़ों तक पहुंच रही है।- जशन गिल, एसपी, साइबर क्राइम पुलिस पंजाब

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