वास्तुदोषों को दूर करने में पेड़ पोधों की अहम भूमिका होती हैं -डॉ भूपेंद्र वास्तुशास्त्री

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होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा : वास्तु शास्त्र में भवन का आकार ,निर्मित इकाई, दिशा ,रंग,आंतरिक संरचना,साज सज्जा,पंच तत्वों के साथ पेड़ पौधों को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया हैं, सही दिशा में लगे पेड़ पौधे बड़े से बड़े वास्तु दोष को दूर करने में सक्षम होते हैं ओर गलत दिशा में लगे पेड़ पौधे भवन में वास्तु दोष उत्पन्न भी कर देते हैं। ऐसा मानना है अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवम लेखक डॉ भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का।
घर में पौधे लगाने हो तो सबसे पवित्र, देवतुल्य,पूजनीय तुलसी जी का पौधा ईशान कोण उतर ओर पूर्व दिशा में लगाएं, जिस जगह पर तुलसी का पौधा है वहां की साफ सफ़ाई पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है । सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर तुलसी का पौधा धन समृद्धि स्वास्थ्य मान सम्मान यश कीर्ति देता है साथ ही वास्तु दोषों को भी हरण करता है । ध्यान रखें तुलसी जी का पौधा दक्षिण दिशा व नेरित्य में लगा है तो वह शुभ फल नहीं देगा।
आंवले के पेड़ भी सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होते है आंवले को घर से नियत दूरी बनाकर पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
अशोक भी सकारात्मक ऊर्जा का कारक पेड़ है इस पेड़ को घर की किसी भी दिशा में लगाएं शुभ ही शुभ होता है लेकिन घर के पश्चिमी भाग से दक्षिणी भाग में हो तो ज्यादा लाभदायक होगा। अगर आप अनार का पौधा लगाना चाहते हैं तो इस पौधे को सिर्फ आग्नेय कोण में ही लगाया जा सकता हैं।
पीपल को घर में भूल कर भी नही लगाना चाहिए अगर घर से दूर पश्चिम दिशा में किसी सार्वजानिक स्थान पर पर लगाएं तो शुभ है बाकी सभी दिशाओ में अशुभ परिणाम देने वाला होता है।पीपल का पौधा जिस घर में उग जाता है वहाँ पर पितृ दोष की स्थिति बनी होती है ।
बरगद का पेड़ भी घर से दूर पूर्व दिशा में शुभ माना गया हैं।
आम का पेड़ उतर दिशा में लगाना चाहिए।
शीशम सागवान देवदार व ज्यादा उंचाई वाले पेड़ दक्षिणी भाग व पश्चिमी भाग में घर से थोड़ी दूर लगाने चाहिए। नीम का पेड़ घर आँगन के ब्रह्म में नहीं लगाना चाहिए ।
अनार व हरश्रृंगार के पौधे भी अति शुभता की श्रेणी में आते हैं इन पौधों को पूर्व दिशा व आग्नेय कोण में लगा कर वास्तु का लाभ प्राप्त कर सकते है
काटेदार, दूधिया ,बबूल, बोनसुई, सफेदा व बेलिय पोधेः वास्तु में अशुभ माने गए है। इन प्रजाति के पौधो को घरों में नहीं लगाना चाहिए।
घर की दक्षिण दिशा में लाल फूलों वाले पूर्व दिशा में सफेद और पीले फूलों वाले उतर दिशा में सफ़ेद एवम औषधीय व बड़ी पत्तियों वाले पौधे व पश्चिम दिशा में हल्के रंगो बैंगनी चाकलेटी रंगो के साथ छोटे पत्तो के पौधे लगा कर घर में सकारात्मक वातावरण उत्पन्न किया जा सकता हैं। दिन के द्वितीय और तृतीय पहर किसी भी पेड़ की छाया भवन की छत पर नहीं पड़नी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।क्योंकि छायावेद भी वास्तु दोष की श्रेणी में आता है ।

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