लोकसभा में तिवारी ने चंडीगढ़ के कल्याण से जुड़े संकट और पूर्व सैनिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 12 फरवरी: चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने आज अक्टूबर 2025 से चंडीगढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए धनराशि आवंटित न किए जाने पर “गहरा रोष” व्यक्त किया है। लोकसभा में बोलते हुए, तिवारी ने सदन को याद दिलाया कि सीधे तौर पर केंद्र सरकार के अधीन आते केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को केंद्रीय बजट में प्रतिवर्ष 6,500–6,900 करोड़ रुपए का आबंटन मिलता है। लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अक्टूबर 2025 से चंडीगढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए कोई आबंटन नहीं किया गया है।
तिवारी ने कमजोर वर्गों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, कहा कि वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन का वितरण नहीं हुआ है। उन्होंने खुलासा किया कि यह कहा जा रहा है कि बजट उपलब्ध नहीं है और मई के महीने में धनराशि उपलब्ध होने पर आबंटन किया जाएगा। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि चंडीगढ़ में पेंशन के रूप सहायता मात्र 1,000 रुपए है, जबकि पंजाब में 1,500 रुपए और हरियाणा में 3,500 रुपए पेंशन दी जा रही है।
तिवारी ने सदन के संज्ञान में यह भी लाया कि चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक भी रहते हैं, जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए बहादुरी और सम्मान के साथ सेवा दी है। लेकिन यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त विधेयक 2026 के पैरा 108, पन्ना 88 में सेवा तत्व और विकलांगता पर आयकर छूट को केवल उन सैनिकों तक सीमित कर दिया गया है, जिन्हें सेवा से चिकित्सकीय आधार पर बाहर किया गया है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का सीधे तौर पर उल्लंघन है।
उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखते हुए, कहा कि पहले चंडीगढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए तुरंत धनराशि आवंटित की जाए। दूसरी, जब इस सदन में वित्त विधेयक पर चर्चा हो, तो वित्त मंत्री सेवा तत्व और विकलांगता पर आयकर छूट को पूर्ण रूप से बहाल करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इससे हमारे उन सैनिकों की गरिमा और सम्मान बहाल होगा, जो देश को बचाने के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हैं।
