चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी के निरंतर प्रयासों से डड्डू माजरा डंप पर केंद्र की कार्रवाई हुई तेज

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वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना को मंज़ूरी मिली, चंडीगढ़ के सबसे बड़े कचरा डंप की बायो-रिमेडिएशन का रास्ता साफ

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 16 फ़रवरी: चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने आज कहा है कि डड्डू माजरा कचरा डंप को समाप्त करने और साइट की बायो-रिमेडिएशन के लिए संसद में उनके लगातार उठाए गए मुद्दों का असर अब दिखाई दे रहा है, जो बात केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन राज्य मंत्री तोखन साहू की ओर से मिले जवाब से स्पष्ट होती है। तिवारी ने कहा कि इस लंबे समय से लंबित मुद्दे को उन्होंने न केवल संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया, बल्कि संसद में भी बार-बार निर्णायक कार्रवाई की मांग की।

मीडिया को जानकारी देते हुए, तिवारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने ‘वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना’ को मंज़ूरी दे दी है और परियोजना में केंद्र के हिस्से की स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर को नियम 377 के तहत संसद में तिवारी ने डड्डू माजरा कचरा डंप को ‘लगातार स्वास्थ्य के लिए खतरा’ बताते हुए इसकी पूर्ण और अंतिम सफाई की मांग की थी। उन्होंने कहा कि डड्डू माजरा कचरा डंप को समाप्त करने और साइट की बायो-रिमेडिएशन के लिए संसद में की गई लगातार कोशिशें अब राज्य मंत्री के जवाब से आगे बढ़ती दिख रही हैं।

तिवारी ने सख़्त लहजे में कहा कि जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने इस मुद्दे पर उनके निरंतर प्रयासों का अंततः परिणाम सामने आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डंप साइट की सफाई सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी अभी भी चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन की ही है। निगम और प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट है, क्योंकि इन्होंने संसद, अदालतों और संसदीय स्थायी समितियों को अलग-अलग समय-सीमाएं दीं, लेकिन बाद में उन प्रतिबद्धताओं की अनदेखी की।

तिवारी ने ज़ोर देते हुए, कहा कि चंडीगढ़ नगर निगम को अस्थायी उपायों से आगे बढ़कर डंप साइट की पूरी सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी। उन्होंने डड्डू माजरा में बंद पड़े ठोस कचरा प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर भी केंद्र से बार-बार सवाल उठाए, जो स्थिति आधिकारिक आंकड़ों से उलट है और अधिकारी सीधे जवाबों से बच रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने मज़दूरों के वेतन में देरी, कचरा प्रोसेसिंग के वैकल्पिक इंतज़ामों की कमी और साइट के प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार डिफॉल्टिंग कंसेशनरी के खिलाफ कमज़ोर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि इस समस्या का वास्तविक और टिकाऊ समाधान चार शहरों चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ के लिए एक मेगा इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में निहित है, जिसमें इन चारों शहरों की भौगोलिक सीमाओं के भीतर आने वाले सभी नगर निकाय शामिल हों। यह परियोजना भारत सरकार द्वारा एक केंद्रीय परियोजना के रूप में शुरू की जानी चाहिए।

तिवारी ने अफ़सोस जताते हुए, कहा कि केंद्र सरकार इन चारों शहरों को एकीकृत क्षेत्र के रूप में देखने की बजाय अलग-अलग साइलो में देखती है, फिर चाहे वह आर्थिक विकास हो, कनेक्टिविटी हो, रोज़गार सृजन हो या फिर कचरा प्रबंधन का दृष्टिकोण हो। इसी कारण ये चारों शहर अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

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