लुधियाना, 22 फरवरी: ज़िला कांग्रेस कमेटी लुधियाना (शहरी) के पूर्व अध्यक्ष और पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पवन दीवान ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर तीखा हमला बोलते हुए, उनकी कड़ी आलोचना की है। दीवान ने कहा कि सैनी द्वारा की जा रही रैलियां “छोटी सोच वाली वोट-बैंक की राजनीति” का प्रतीक हैं। उनका आरोप है कि 2027 के चुनावों से पहले भाजपा के लिए वोट जुटाने के उद्देश्य से सैनी पंजाब के दौरों पर हैं। यदि उन्हें वास्तव में पंजाब की चिंता होती, तो रैलियों के बजाय उनकी पार्टी राज्य की वास्तविक समस्याओं का समाधान करती।
यहां एक जारी बयान में, दीवान ने कहा कि पंजाब को लंबित केंद्रीय ग्रांटों को तत्काल रिलीज करने, संघर्षरत उद्योगों के लिए राहत पैकेज और कृषि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदमों की सख्त आवश्यकता है। ये मुद्दे राजनीतिक दिखावे के नहीं हैं, बल्कि पंजाब का भविष्य तय करने वाले हैं।
दीवान ने आज लुधियाना में हुई ‘पूर्वांचल सम्मान रैली’ में सैनी के भाषण को प्रवासियों के सम्मान से जोड़ने पर तंज कसते हुए, कहा कि यह महज़ “खोखला प्रदर्शन” है। उन्होंने जोर देते हुए, कहा कि यदि भाजपा ने प्रवासी मज़दूरों के प्रति थोड़ी भी वास्तविक चिंता दिखाई होती, तो लुधियाना का कभी फलता-फूलता उद्योग आज हांफता नज़र नहीं आता। जब औद्योगिक रीढ़ ही कमजोर हो, तो उस पर निर्भर मज़दूर वर्ग, जिसमें अधिकांश प्रवासी हैं, स्वाभाविक रूप से प्रभावित होता है। उनके अनुसार, ढांचागत विफलताओं और आर्थिक तंगी को दूर करने के बजाय सैनी रैलियों के जरिए भाजपा की कमजोरियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, क्योंकि एनडीए सरकार अहंकारवश केंद्रीय ग्रांटों, विशेषकर रूरल डेवलपमेंट फंड को रिलीज करने में विफल रही है, जो पंजाब की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। इन महत्वपूर्ण संसाधनों को जानबूझकर रोका जाना विकास को कमजोर करता है और केंद्र की पंजाब के प्रति उदासीनता को उजागर करता है।
दीवान ने यह भी कहा कि सैनी अंधाधुंध नरेंद्र मोदी सरकार का बचाव कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि आम नागरिक दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे हालात में पंजाब में रैलियां कर लोगों की चिंताओं से जुड़ने का दिखावा करना मात्र नाटक है, यह छोटी राजनीति के लिए रचा गया पाखंड है। उन्होंने कहा कि चाहे नाटकबाज़ी कितनी भी ऊंची क्यों न हो, सच्चाई छिपाई नहीं जा सकती।
