एंटी-चिट्टा अभियान में कोताही बर्दाश्त नहीं —डीसी जतिन लाल की दो टूक चेतावनी

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संवेदनशील पंचायतों की नशा निवारण समितियों को सख्त हिदायत, अनुपस्थित प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस
सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर भी कड़ाई के निर्देश
रोहित जसवाल।  ऊना, 25 फरवरी. ऊना जिले में नशा निवारण अभियान को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि एंटी-चिट्टा अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा पंचायत स्तर पर गठित नशा निवारण समितियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।May be an image of studying, table and text
वे बुधवार को डीआरडीए सभागार में एन-कॉर्ड (राष्ट्रीय नार्को समन्वय पोर्टल) के तहत गठित जिला स्तरीय समिति तथा इसके उपरांत आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ भी उपस्थित रहे।
नशा निवारण में ढिलाई नहीं चलेगी
उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में नशा उन्मूलन पर विशेष फोकस किया गया है और इसी क्रम में व्यापक एंटी-चिट्टा अभियान संचालित है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी पंचायतों में स्थानीय स्कूल अथवा कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में नशा निवारण समितियां गठित की गई हैं। इनमें से 10 पंचायतों को ‘चिट्टा’ के दृष्टिकोण से संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जहां विशेष सतर्कता और सक्रियता अपेक्षित है।
इन संवेदनशील पंचायतों की समितियों के अध्यक्ष के रूप में संबंधित स्कूल एवं कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को बैठक में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, किंतु कुछ प्रधानाचार्यों की अनुपस्थिति पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार देते हुए अनुपस्थित प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि भविष्य में इस प्रकार की उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी तथा संतोषजनक उत्तर न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।May be an image of studying
जनता को अभियान से जोड़ें
जतिन लाल ने निर्देश दिए कि सभी नशा निवारण समितियां नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित करें तथा स्थानीय समुदाय, युवाओं, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों को अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ें। उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने और संबंधित सूचनाएं तत्काल प्रशासन व पुलिस को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जो सदस्य अपेक्षित सहयोग नहीं दे रहे हैं, उनकी जानकारी प्रशासन को दी जाए ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
पुनर्वास केंद्रों की कड़ी निगरानी पर ज़ोर
उपायुक्त ने नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्रों के औचक निरीक्षण के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पाए जाने पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत गठित जिला स्तरीय समिति को अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप केंद्रों की गहन जांच सुनिश्चित करने को कहा। प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों पर विशेष बल दिया।
सड़क सुरक्षा पर भी सख्त रुख
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में दुर्घटना संभावित स्थलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने ब्लैक स्पॉट सुधार, आवश्यकतानुसार पैराफिट लगाने तथा तेज और लापरवाह वाहन चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिले के प्रमुख बाजारों में घोषित नो-पार्किंग और नो-वेंडिंग जोन को प्रभावी ढंग से लागू करने के भी निर्देश दिए। उपायुक्त ने एसडीएम एवं पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई
बैठक में पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ ने बताया कि जिले में एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाया जाएगा तथा सभी विभागों के समन्वित सहयोग से कार्रवाई तेज की जाएगी।
उन्होंने केमिस्ट दुकानों के नियमित निरीक्षण, दवाओं के स्टॉक एवं रिकॉर्ड की जांच तथा प्रतिबंधित अथवा अवैध दवाओं की बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सड़क सुरक्षा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि रैश ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है।
बैठक में एएसपी सुरेंद्र शर्मा, सीएमओ डॉ. संजीव वर्मा, एसडीएम बंगाणा सोनू गोयल, एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम, डीएसपी हरोली मोहन रावत, डीएसपी अंब अनिल पटियाल सहित पुलिस, प्रशासन के अधिकारी तथा विभिन्न पंचायत स्तरीय नशा निवारण समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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