चंडीगढ़ : हरियाणा में रात के 1.30 बजे तक 16 घंटे चले हाई-वोल्टेज चुनावी ड्रामे के बाद कांग्रेस पार्टी दो में से एक राज्यसभा सीट जीत पाई। इसका भी पूरा श्रेय भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक अभियान को दिया जा रहा है।
उनके ‘ऑपरेशन हिमाचल’ की वजह से ही कांग्रेस बेहद कम अंतर से एक सीट पर कब्जा कर पाई। इस जीत के साथ ही कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के कब्जे वाली एक सीट को प्रभावी रूप से अपने नाम कर लिया है।
कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोट किया था जिनमें से चार के वोट रिटर्निंग ऑफिसर पंकज ऑफिसर ने अमान्य घोषित कर दिए। बीजेपी का पूरा प्लान पहले ही तैयार था। बीजेपी ने निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदेल को भी अपने पक्ष में कर लिया था। हुड्डा को पता था कि इसमें मार्जिन ऑफ एरर शून्य है। 2016 में इसी तरह का विवाद हुआ ता और 12 कांग्रेस विधायकों के वोट अमान्य घोषित कर दिए गए थे। 2022 में कुलदीप बिश्नोई ने बीजेपी को वोट कर दिया था और एक वोट अमा्य हो गया था और कांग्रेस नेता अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था। हुड्डा इस तरह की घटना को दोबारा नहींहोने देना चाहते थे। आफताब अहमद और चीफ विप बीबी बत्रा को कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
क्या है ऑपरेशन हिमाचल?
10 से 15 मार्च तक विधानसभा का सत्र स्थगित होने के बाद हुड्डा ने अहमद और बत्रा से कहा कि वे चंडीगढ़ से बाहर ना जाएं। इसके बाद कांग्रेस विधायकों को हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना ले जाने का कहा गया। जब दूरी की वजह से इनकार कर दिया गया तो हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सिखू से संपर्क किया गया और फिर एक होटल बुक किया गया। 13 मार्च को सभी कांग्रेस विधायक हुड्डा के आवास पर लंच के लिए इकट्ठे हुए।
इसके बाद यहीं से उन्हें हिमाचल के होटल में पहुंचा दिया गया। तब भी पांच विधायक अलग-अलग वजहों से चंडीगढ़ में ही रुक गए। विधायकों को यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। हुड्डा विधायकों के साथ ही मौजूद थे। हुड्डा गुट के तीन और सांसद वरुण चौधरी, जय प्रकाश और सतपाल ब्रह्मचारी भी उनके साथ थे।
16 मार्च को वोटिंग वाले दिन सबको चंडीगढ़ लाया गया और हुड्डा के आवास पर ही नाश्ते के लिे ले जाया गया। यहीं से सीधा विधायक विधानसभा पहुंचे। वोटिंग से पहले उनके फोन जमा करवा लिए गए थे। हिमाचल ट्रिप पर ना जाने वाले विधायकों में से चंद्र मोहन और मोहम्मद इलियास को लेकर खुद हुड्डा पहुंचे। वे हुड्डी की ही कार में विधानसभा गए थे। जब तक जीत हार का फैसला नहीं हो गया तब तक हुड्डा विधानसभा में ही मौजूद थे।
कम अंतर से जीत
आखिर में कर्मवीर बौद्ध को 2800 वोट मिले। वहीं बीजेपी प्रत्याशी संजय भाटिया को 2767 वोट मिले थे। बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदेल को 2732 वोट मिले। बौद्ध और भाटिया को विजयी घोषित किया गया।आईएनएल के दो विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। बीजेपी का भी एक वोट अमान्य घोषित किया गया। पांच विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग की खबरें भी सामने आईं। गौतम ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस केवल 0.3 प्रतिशत के मामूली अंतर से जीती है, जो दर्शाता है कि विपक्ष के विधायकों को अपने नेतृत्व पर पूरा भरोसा नहीं था।
दूसरी ओर, कांग्रेस खेमे ने इस परिणाम को लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत और सत्ताधारी दल की तानाशाही के खिलाफ एक कड़ा संदेश बताया है। हरियाणा कांग्रेस के सह-प्रभारी जितेंद्र बघेल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने प्रक्रिया को प्रभावित करने और विधायकों को डराने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी झोंक दी थी। श्री बघेल ने कहा कि इन तमाम हथकंडों के बावजूद विपक्ष एकजुट रहा और यह संवैधानिक अधिकारों की बड़ी जीत है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इन भावनाओं को दोहराते हुए इस जीत को वोट की चोरी करने वालों की हार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का प्रमाण बताया।
गौरतलब है कि हरियाणा की ये दोनों सीटें पहले भाजपा के पास थीं, जिन पर किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल नौ अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें से एक सीट जीतकर कांग्रेस ने उच्च सदन में राज्य से भाजपा की संख्या कम करने में सफलता प्राप्त की है। इससे पहले दिन में, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पार्टी की जीत पर अटूट विश्वास व्यक्त किया था।
