पुलवामा अटैक की प्लानिंग, सेना की मूवमेंट की जानकारी, गाजियाबाद के गद्दारों का खुला राज, आका निकला ISI

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गाजियाबादः उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से पकड़े गए 6 संदिग्धों से हुई पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. बताया जा रहा है कि ये सभी संदिग्ध आईएसआई की एक बड़ी साजिश के हिस्सा थे।संदिग्ध जासूसी नेटवर्क पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर काम कर रहा था. भारत में बैठे-बैठे देश के सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण स्थानों की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के पास भेज रहे थे. इस मामले में गिरफ्तार सभी आरोपी 7 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. सूत्रों के मुताबिक पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में एक और बड़े हमले की साजिश रची जा रही थी. आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गाजियाबाद में गिरफ्तार किए गए छह में से चार आरोपी हमले के बाद पुलवामा गए थे।

दिल्ली से जम्मू के बीच हर बड़े स्टेशन पर लगाना था कैमरा :  सूत्रों के मुताबिक, रेलवे स्टेशनों पर कैमरे लगाना इसी साजिश का हिस्सा था. दिल्ली से जम्मू तक हर बड़े रेलवे स्टेशन पर कैमरे लगाए जाने थे. आतंकियों का मंसूबा था कि कश्मीर में हमले के बाद सेना की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उस पर दोबारा हमला किया जा सके. सूत्रों के मुताबिक पुलवामा गए चारों आरोपियों ने कई सवेंदनशील जानकारियां पाकिस्तान भेजी थीं. पुलवामा के बाद चारों आरोपियों को लद्दाख भेजने की भी व्यवस्था की थी, मगर चारों ने मना कर दिया था. इसी वजह से सुहेल और ईरम लगातार गाजियाबाद आ रहे थे और उन्हें यहां कुछ और युवाओं की तलाश थी, जो यह काम कर सकें।

पाकिस्तानी आकाओं को भेजते थे सीक्रेट डिटेल : सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के वीडियो, फोटो और लोकेशन पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भेजते थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियां भी अलर्ट मोड में हैं. दरअसल पकड़े गए छह आरोपी सुहैल मलिक, सानेहरम उर्फ मेहक, राज वाल्मीकि, शिव वाल्मीकि, रितिक गंगवार और प्रवीण को रिमांड पर लिया गया है. जांच में मलेशिया और यूके के नंबरों के साथ ही सऊदी अरब से जुड़े एक हैंडलर का भी सुराग मिला है. आशंका है कि इन नंबरों पर भी सवेदनशील जानकारी भेजी गई।

फोटो और लोकेशन भेजने पर मिलते थे 20 हजार :  पुलिस का कहना है कि आरोपी देशभर में पचास से अधिक सोलर कैमरे लगाने की योजना में थे. महिला इरम उर्फ महक लोगों को जोड़ने का काम कर रही थी. एनआईए और एटीएस के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क को खत्म करने की कार्रवाई जारी है. आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है. आरोपी पाकिस्तान के हैंडलरों को संवेदनशील स्थानों की लोकेशन, फोटो और वीडियो भेजते थे. इसके बदले उन्हें पांच हजार से बीस हजार रुपये तक मिलते थे. जांच एजेंसियां अब आरोपियों को उन स्थानों पर ले जाएंगी, जहां इन्होंने सोलर कैमरे लगाए थे या वीडियो बनाए थे।

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