एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश की राजनीति में नशे के मुद्दे को लेकर एक बार फिर से तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में “चिट्टा” (सिंथेटिक ड्रग) गांव-गांव तक पहुंच गया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार नशे के नेटवर्क पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रही, जिसका खामियाजा आज प्रदेश के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
सुक्खू ने कहा कि नशे का कारोबार सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान कानून-व्यवस्था कमजोर रही और नशा तस्करों के हौसले बुलंद होते गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नशे की लत ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है। युवा पीढ़ी, जो प्रदेश का भविष्य है, वह इस जाल में फंसती जा रही है। सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा न जाए।
दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने सुक्खू के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान उनकी सरकार के दौरान भी लगातार चलाए गए और कई बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया गया। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता की चिंता नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर बनी हुई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और समन्वित प्रयासों की जरूरत है। जागरूकता अभियान, कड़ी कानून व्यवस्था और पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई लंबी और जटिल है, जिसमें सरकार, समाज और परिवारों को मिलकर काम करना होगा। फिलहाल, सुक्खू के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है।
