नई दिल्ली : रूस ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने वाला अहम फैसला लेते हुए 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने की तैयारी की है। उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रूस का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उठाया जा रहा है।
रूसी अधिकारियों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव—खासकर इजराइल और ईरान के बीच जारी टकराव—की वजह से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसके चलते पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
रूस फिलहाल रोजाना करीब 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात करता है। ऐसे में निर्यात पर रोक से चीन, तुर्किये, ब्राजील, अफ्रीकी देशों और सिंगापुर जैसे बड़े खरीदार प्रभावित हो सकते हैं, जो रूसी ईंधन पर काफी हद तक निर्भर हैं।
भारत पर असर कितना : विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का भारत पर सीधा असर सीमित रहेगा। इसकी वजह यह है कि भारत तैयार पेट्रोल के बजाय मुख्य रूप से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात करता है। देश अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, जिसमें करीब 20% हिस्सेदारी रूस की है।
भारत के पास मजबूत रिफाइनरी नेटवर्क है, जिसके जरिए कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल और डीजल तैयार किया जाता है। देश रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करता है और न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी करता है, बल्कि तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि रूस के इस कदम से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। पहले ही मिडिल ईस्ट तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। कुल मिलाकर, रूस का यह फैसला भले ही घरेलू बाजार को स्थिर करने के लिए लिया गया हो, लेकिन इसके असर से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
