नई दिल्ली : 5 अप्रैल : टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर राम लीला मैदान, दिल्ली में देशभर से बड़ी संख्या में अध्यापकों ने पहुंचकर 1 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के टीईटी को पिछली तारीख से लागू करने के फैसले के विरोध में रोष प्रदर्शन किया। इस मौके पर डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम देव सिंह ने संबोधित करते हुए टीईटी की अनावश्यक शर्त को हटाने के लिए देश की संसद में शिक्षा का अधिकार कानून-2009 में आवश्यक संशोधन का कानून पारित करने की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लाए जा रहे “टेन्योर ट्रैक सिस्टम” को अध्यापकों की सेवा सुरक्षा को कमजोर करने वाला साधन बताते हुए इसे रद्द करने की मांग उठाई।
इस मौके पर डीटीएफ पंजाब के साथ तालमेल वाले संघर्ष में शामिल डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन हरियाणा के चेयरमैन धर्मेंद्र ढांडा ने अपने संबोधन के दौरान निजीकरण समर्थक राष्ट्रीय शिक्षा नीति को रद्द करने की मांग उठाई। दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा टीईटी की गैरवाजिब शर्त वापस लेने के बजाय शिक्षा क्षेत्र में कॉर्पोरेट समर्थक नीतियां लागू करने की आलोचना करते हुए पंजाब और हरियाणा के अध्यापकों द्वारा अन्य राज्यों के साथ शिक्षा और अध्यापक हितों के लिए किए जा रहे संघर्ष के साथ एकजुटता व्यक्त की।
इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा मुकेश कुमार संयुक्त सचिव, सुखदेव डांसीवाल प्रदेश प्रचार सचिव, डॉ. रामशरण, सुखविंदर गिर, मेघ राज, अमन वशिष्ठ, जर्नैल सिंह, रमेश मलकोवाल, राज सैनी, मनजीत लहरा, पवन कुमार नाभा, रविंद्र राजन, हरबंस सिंह, भीम सिंह, रेखा, वरिंदर, सुभाष शर्मा, विष्णु और वेदपाल ने भी शमूलियत की।
नेताओं ने बताया कि डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब द्वारा संगरूर में 11 अप्रैल को पंजाब सरकार द्वारा किए गए वादाखिलाफियों (सुप्रीम कोर्ट के टीईटी संबंधी फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दायर न करने, इसके खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास न करने, पंजाब की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा नीति न बनाने और पुरानी पेंशन का नोटिफिकेशन जारी करने के बावजूद लागू न करने) के विरोध में मुख्यमंत्री के निवास की ओर ‘वादाखिलाफी मार्च’ किया जा रहा है। नेताओं ने पंजाब के समूचे अध्यापक वर्ग को इस मार्च में शामिल होने का आह्वान किया।
