बद्दी, 17 अप्रैल (तारा) : बद्दी नगर के पलाखंवाला में आयोजित श्री मदभागवत कथा के पांचवे दिन शुक्रवार को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कथावाचक आचार्य 108 साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ने
नरकासुर और बाणासुर की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि यह वृतांत भगवान कृष्ण की लीलाओं और धर्म की स्थापना से जुड़ा है। नरकासुर पृथ्वीपुत्र (वराह अवतार) था, लेकिन उसने बाणासुर की संगति में दुष्ट बनकर 16,000 स्त्रियों का अपहरण और अत्याचार किया, जिसका वध कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से किया। बाणासुर बलि का पुत्र और शिवभक्त था, जिसने अहंकार में कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को बंदी बनाया, लेकिन अंत में कृष्ण ने उसकी भुजाएं काटकर उसका मानमर्दन किया।
नरकासुर (भौमासुर) प्राग्ज्योतिषपुर का राजा, जिसने अदिति के कुंडल छीने और स्वर्ग पर आक्रमण किया।
नरकासुर को वरदान था कि वह केवल अपनी मां (भूमि देवी/सत्यभामा) के हाथों मारा जा सकता है। श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर उसका वध किया। उसकी मृत्यु की खुशी में ‘नरक चतुर्दशी’ मनाई जाती है।
बाणासुर के बारे बताया कि बाणासुर एक हजार भुजाओं वाला राजा था, जो शिव का परम भक्त था।
बाणासुर-कृष्ण युद्ध: बाणासुर की पुत्री उषा ने अनिरुद्ध से विवाह किया, जिससे क्रोधित होकर उसने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया। श्रीकृष्ण और शिव के बीच युद्ध हुआ, अंत में श्रीकृष्ण ने बाणासुर की केवल दो भुजाएं छोड़ीं।
यह कथा बुराई पर अच्छाई (नरकासुर) और अहंकार पर भक्ति (बाणासुर) की विजय को दर्शाती है।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष अच्छर पाल कौशल, कृषि देवी, सुशीला, उर्मिला, सुदर्शन, प्रोमिला, कार्तिक कौशल, सोनिया,
मीना कौशल, विधि चंद राणा जी, बिल्लू खान, संजय शर्मा, रवि हिसारिया, बीडीसी पुष्पिंदर कौर, दिशा देवी, सत्य देवी, पूर्व ई टीओ रामसरुप चौहान, बॉबी शर्मा, अभिषेक ठाकुर, उपाध्यक्ष युवा कांग्रेस दून, जसविंद चौहान, प्रदेश सचिव यूथ इंटक, पूर्व इंस्पेक्टर नंद लाल, सुमन, भागो देवी, कांता, सोनाली, प्रेमलता, रवि, मोहन लाल, सतीश, सुनीता, सुलोचना,सुदेश, चंचल, सोनू देवी, कौशल्या, सुरिंदरा, अनुराधा, मनोहर सिंह, भजन सिंह, सिमरन, प्रियंका, हरीश, दीपक , दिलबाग, हरबंस, रमेश, सोहन लाल, कमल चंद, बुध राम,आंचल, सूर्यांश, अंशुमन, सीमा, निर्मला, बेबी, रीना,मीना कौशल, कृष्ण चौहान, आशा राजपूत, दीपा शर्मा, मीना गुप्ता, राजकुमारी, अशोक व बहुत से गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
