केंद्र सरकार ने इन फसलों की MSP बढ़ाई : यूनियन कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला…धान का MSP 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये किया प्रति क्विंटल

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नई दिल्ली : केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार ने बुधवार (13 मई 2026) को भारत की ऊर्जा (Energy) सुरक्षा और खेती को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ मार्केटिंग सेशन सत्र 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल किया।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव में कहा कि सरकार ने खेती के आने वाले सीजन (2026-27) के लिए 14 मुख्य फसलों के सरकारी दाम (MSP) बढ़ा दिए हैं, जिसका इसका मतलब है कि अब सरकार इन फसलों को किसानों से पहले के मुकाबले ज्यादा ऊंचे दामों पर खरीदेगी।

किसानों को केंद्र सरकार को तोहफा :  उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से किसानों के हित में एक के बाद एक बड़े फैसले लिए गए हैं. किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम और कम से कम 50 परसेंट प्रॉफिट मिले, इसके लिए 2019 में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया था. प्रधानमंत्री ने तय किया कि खेती की कुल लागत पर 50 परसेंट प्रॉफिट जोड़कर मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) तय किया जाएगा. उस फैसले के अनुसार, बाद के सभी खरीफ और दूसरी फसलों से जुड़े फैसले इस फॉर्मूले पर लिए गए हैं लागत + 50 परसेंट प्रॉफिट = MSP ।

किन फसलों पर कितना बढ़ा MSP :  केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, ‘खरीफ फसलों के बारे में आज के फैसले में सभी मुख्य खरीफ फसलों के लिए लागत प्लस 50 परसेंट प्रॉफिट या उससे भी ज्यादा पर MSP तय किया गया है. इस पूरे फैसले से किसानों को कुल लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये का पेमेंट होगा. MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी के बीज (622 रुपये प्रति क्विंटल) की हुई. इसके बाद कपास (557 रुपये प्रति क्विंटल), नाइजरसीड (515 रुपये प्रति क्विंटल) और तिल (500 रुपये प्रति क्विंटल) का MSP बढ़ाया गया.।

उन्होंने कहा, ‘किसानों को उत्पादन लागत पर होने वाला अनुमानित मुनाफा मूंग (61%) के लिए सबसे ज्यादा रहने का अनुमान है, जिसके बाद बाजरा (56%), मक्का (56%) और अरहर/तूर (54%) का नंबर आता है.’ एनर्जी के क्षेत्र में भारत कैसे आत्मनिर्भर बनेगा इसे लेकर भी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘भारत के पास इतना कोयला है कि वह अगले 200 सालों तक हमारी जरूरतों को पूरा कर सकता है. सरकार अब तकनीक का इस्तेमाल करके इस कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदलेगी ।

कोयले से गैस बनाएगा भारत : केंद्र सरकार की ओर से बताया कि कोयला गैसीकरण योजना (Coal Gasification Scheme) के तहत कोयले को गैस में बदलने के बाद इस गैस का इस्तेमाल तीन बड़े कामों के लिए किया जाएगा. पहला खाद- खेती के लिए यूरिया और अन्य खाद बनाने में. दूसरा बिजली- पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हुए बिजली पैदा करने में. तीसरा केमिकल- अलग-अलग तरह के इंडस्ट्रियल केमिकल बनाने में. उन्होंने कहा, ऐसा करने से हमारी दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी. अभी हमें बहुत सारी गैस और केमिकल दूसरे देशों से खरीदने पड़ते हैं. दुनिया के हालातों को देखते हुए, अपनी गैस खुद बनाना ज्यादा सुरक्षित है।

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