बीबीएन, 20 मई : क्षेत्र में पंचायत चुनावों के चलते स्थानीय कई मुद्दे धुंधले पड़ गए है। जिस प्रकार मौसम में गर्मी जोर पकड़ती जा रही है उसी प्रकार चुनाव का शोर भी बढ़ता जा रहा है।अब स्थानीय मुद्दे भूल गए है एक दूसरे को चुनाव में जिताने के लिए गोटियां फिट करने में लगे है। क्षेत्र का सबसे बड़ा अवैध खनन का मुद्दा भी थम सा गया है। असल मे प्रशासन और पुलिस चुनावो के चलते व्यस्त होने के कारण खनन माफिया ने दिन रात एक कर दिया है। यही नही यह खनन माफिया अपने और धंधे को चमकाने के लिए चुनावो में भी कई पंचायतों में उतरे है। चुनाव जीतने के लिए पानी की तरह पैसा बरसा रहे है ताकि प्रधान बनकर क्षेत्र में जो थोड़ी बहुत भूमि बची है उसे निशाना बनाया जा सके। यह माफिया इतना प्रभावशाली है कि इनके सामने लोग बोलते नही है। इसी तरह नशे का कारोबार करने वाले भी दिन प्रतिदिन फलते फूलते जा रहे है। जबकि चुनावो में शराब तो आम बात है लेकिन वोटर को रिझाने को लिए अन्य कई प्रकार के नशे भी प्रयोग मे लाये जा रहे है जो जैसा नशा करता है उसे वही दिया जाता है। इसके अलावा सड़के, पेयजल, स्कूलों में रिक्त पद, स्वास्थ्य सेवाएं सब मुद्दे धुंधले पड गए है। जिला सोलन का बी.बी.एन. क्षेत्र जहां पर सबसे महंगा चुनाव होता है। दून हल्के में दो तीन पंचायते ऐसी है जहां पर एक प्रत्याशी 50 लाख भी पार कर देता है। जिला परिषद के लिए तो कहने ही क्या। इनमें तो चुनाव प्रचार बहुत महंगा होता है।चुनावो में इस बार प्रत्याशियों की बाढ़ सी आई है छोटी छोटी पंचायतों में प्रधान पद के लिए चार से छह तक उमीदवार भाग्य आजमा रहे है। काफी अर्से बाद गर्मियों के मौसम में यह चुनाव हो रहा है 42 डिग्री से अधिक तामपान में प्रत्याशी सारा दिन तपती धूप में वोट मांगने से पीछे नही हट रहे। औधोगिक क्षेत्र होने के चलते यहां पर प्रधान की अपनी ही एक अलग पहचान है। उधोगो से कबाड़, लेबर और अन्य कार्यो को करने के लिए प्रधान का अलग रुतबा होता है।जैसे जैसे चुनाव की तिथियां नजदीक आ रही है चुनाव उतना ही रोचक होता जा रहा है।
