एचआईवी एड्स नियंत्रण एवं जागरूकता को लेकर जिला स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित
एएम नाथ। धर्मशाला, 11 जून: जिला कांगड़ा में जिला एड्स निवारण एवं नियंत्रण समिति (डीएपीसीसी) तथा भेदभाव उन्मूलन, कानूनी संरक्षण एवं मुख्यधारा से जोड़ने संबंधी जिला स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार की अध्यक्षता में किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के प्रति, समाज में भ्रमों एवं भेदभाव को समाप्त करना समय की आवश्यकता है।
अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने कहा कि एचआईवी एड्स केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि सामाजिक जाÛरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक उत्तरदायित्व से जुड़ा मुद्दा है। संक्रमित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव को समाप्त कर ही हम उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभागांे के समन्वित प्रयासों, समन्वय, जांच, उपचार एवं जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ही एड्स मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने माता से शिशु में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में जिले में एचआईवी एड्स की वर्तमान स्थिति, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति, बच्चों पर आईवी एड्स के प्रभाव तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांगड़ा के सचिव आर मिहूल शर्मा ने बताया कि एचआईवी एड्स से बचाव के लिए विधिक साक्षरता कार्यक्रमों के कैम्पस में विधिक साक्षरता के साथ ही एड़स व एचआईवी के प्रति भी जानकारी दी जाती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विवेक करोल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिले के विभिन्न एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्रों (आईसीटीसी) में 216 एचआईवी पाॅजिटिव मामले सामने आए हैं। इनमें 168 पुरुष, 46 महिला तथा 2 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। कुल मामलों में से 62 व्यक्ति उच्च जोखिम समूहों से संबंधित पाये गए हैं। सभी संक्रमित व्यक्तियों को उपचार सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने बताया कि जिले में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वर्तमान में 9 आईसीटीसी केंद्र, 3 डीएसआरसी, 1 एआरटी केंद्र, 2 ओएसटी केंद्र तथा 98 रेड रिबन क्लब संचालित किए जा रहे हैं, जो जागरूकता, परीक्षण एवं उपचार सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आरके सूद ने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा संचालित मोेबलाइजेशन फाॅर एड्स सुरक्षा अभियान का उद्देश्य 1 दिसंबर 2027 तक देश में एचआईवी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके लिए 1 दिसंबर 2026 तक वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति तथा माता से शिशु में संक्रमण को शून्य स्तर तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि भारत एचआईवी अनुमान-2025 रिपोर्ट के अनुसार जिला कांगड़ा हिमाचल प्रदेश के तीन निम्न-प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल है। जिले में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की अनुमानित संख्या 2,256 है। इनमें से 2,119 व्यक्ति वर्तमान में उपचाराधीन हैं तथा 1,456 मरीजों में वायरल लोड नियंत्रण की स्थिति दर्ज की गई है।
बैठक में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों एवं प्रभावित बच्चों के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
बैठक में एमएस जोनल अस्पताल धर्मशाला डाॅ. अनुराधा, एमएस पालमपुर डाॅ. विजय भागरा, डीएसपी धर्मशाला निशा, एलडीएम पृथ्वी रणवीर, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डाॅ. आशीष भाटिया, महिला बाल विकास अधिकारी कांगड़ा अशोक कुमार, उपसचिव हिप्र शिक्षा बोर्ड राजीव सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा गैर-सरकारी संगठनों एवं सामुदायिक आधारित संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
