17 अगस्त को चंडीगढ़ रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने का ऐलान
गढ़शंकर, 17 जुलाई। पंजाब कर्मचारी एवं पेंशनर संयुक्त फ्रंट, संयुक्त कर्मचारी मंच के फैसले के अनुसार तथा पंजाब वेतनमान, पुरानी पेंशन और भत्तों की बहाली मोर्चा की ओर से 17 जुलाई 2020 नई वेतनमान संबंधी अधिसूचना की प्रतियां जलाकर और काली पट्टियां बांधकर स्थानीय गांधी पार्क में रोष रैली करने के उपरांत बंगा चौक में पत्र की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया।
यहां यह उल्लेखनीय है कि उस समय की कांग्रेस सरकार द्वारा पंजाब के कर्मचारियों पर पंजाब वेतनमान समाप्त करके अधूरा केंद्रीय वेतनमान थोप दिया गया था। जिसके कारण नए भर्ती होने वाले पंजाब के कर्मचारियों के वेतन में भारी कटौती कर दी गई थी। सत्ता में आने से पहले पंजाब के कर्मचारियों के लिए पंजाब वेतनमान और पुरानी पेंशन लागू करने के पक्ष में समर्थन देने वाली ‘आप’ सरकार भी पिछले चार वर्षों से पंजाब वेतनमान, पुरानी पेंशन, डीए और भत्तों की बहाली तथा पेंशनरों की मानी हुई मांगों को लागू करने से किनारा कर चुकी है, बल्कि कर्मचारियों के विरोध में खड़ी रही है। इस दौरान नेताओं द्वारा घोषणा की गई कि जॉइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर 7 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में होने जा रही विशाल राज्य स्तरीय रैली में बड़ी संख्या में भाग लिया जाएगा।
इस मौके पर बातचीत करते हुए मोर्चे के नेताओं मुकेश कुमार, मख्खन सिंह वाहिद पुरी, सेवानिवृत्त एस.डी.ओ. कमलदेव सिंह, अश्वनी कुमार, सुखदेव डानसीवाल, मख्खन सिंह वाहिद पुरी, शाम सुंदर, हंस राज, सतनाम सिंह बंगड़, बलवंत राम ने बताया कि छह वर्ष पहले नए भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए नए वेतनमान लागू करने के समय विपक्ष के रूप में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार के इस फैसले का विरोध किया था और पंजाब के कर्मचारियों से यह वादा किया था कि उनकी सरकार बनते ही इस अधिसूचना को रद्द कर दिया जाएगा। लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार अपने बाकी वादों की तरह इस वादे से भी पूरी तरह मुकर चुकी है। एक तरफ पंजाब के कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ वर्तमान सत्ताधारी दल महंगाई भत्ता (डी.ए.) देने से भी मुकर चुका है और लंबित डीए 18% तक पहुंच गया है। इसके अलावा ग्रामीण और सीमा क्षेत्र भत्ते भी बहाल नहीं किए गए हैं और न ही कंप्यूटर अध्यापकों, एसोसिएट टीचर्स सहित कच्चे कर्मचारियों को विभाग में नियमित किया गया है। इस स्थिति में पंजाब के कर्मचारियों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी पाई जा रही है। मोर्चे के नेताओं ने मांग की कि पंजाब सरकार 17 जुलाई ,2020 के कर्मचारी विरोधी पत्र को रद्द करके छठे पंजाब वेतनमान सहित 15% वृद्धि के अनुसार वेतन निर्धारित करे। इसके साथ ही शिक्षा विभाग में जबरन वेतन कटौती करके नियमित किए गए 1007 गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए पंजाब वेतनमान सहित वर्ष 2018 से लंबित सभी वित्तीय लाभ बहाल किए जाएं। इसके अतिरिक्त पुरानी पेंशन बहाली की अधिसूचना को वास्तविक रूप से लागू करने संबंधी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस.ओ.पी.) जारी करने तथा सभी नई पेंशन योजना (एन.पी.एस.) कर्मचारियों के जी.पी.एफ. खाते खोलने की मांग की गई। इस अवसर पर अश्वनी राणा बीनेवाल , सत्तपाल कलेर, सतपाल मिनहास, गुरमेल सिंह, रतन सिंह, नरेश कुमार, परमा नंद, शिंगारा राम, गुरनाम हाजीपुर, गोपी राम, जोगिंदर सिंह हीर, जीत सिंह बगवाई, नितिन सुमन, सतपाल कलेर, मैडम तृप्ति, हंस राज, बलजीत सिंह, संदीप कुमार, समुद्र सिंह, राजदीप सिंह, गुरमेल सिंह, बिक्रमजीत, कुलवीर सिंह, हरिदेव, मूल राज, लहिंबर सिंह सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।
