बेली ब्रिज बहने के एक साल बाद भी सुरक्षित पुल का इंतजार, ग्रामीण बोले- स्थायी पुल बनने तक बनाया जाए मजबूत अस्थायी पैदल पुल
गुशैणी/बंजार (परस राम भारती)। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल की दूरदराज फलाचन घाटी में सुरक्षित आवाजाही का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। फलाचन नदी पर सुरक्षित पुल नहीं होने के कारण ग्रामीण रज्जु मार्ग और लोहे की ट्रॉली के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं। इसी असुरक्षित व्यवस्था के चलते 15 अगस्त को स्कूल से घर लौट रही 12वीं कक्षा की छात्रा सलोचना ठाकुर हादसे का शिकार हो गई। ट्रॉली से नदी पार करते समय उसके हाथ की दो उंगलियां रस्सी और गरारी की व्यवस्था में फंसकर कट गईं।
ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी स्थान पर एक महिला की उंगली रस्सी में फंसकर कट चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है।
2025 की आपदा में बह गया था बेली ब्रिज
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत मशियार के अंतर्गत दोगड़ा के पास फलाचन नदी पर बना बेली ब्रिज वर्ष 2025 की आपदा के दौरान बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों की आवाजाही के लिए रज्जु मार्ग और लोहे की ट्रॉली की वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
शुरुआत में यह व्यवस्था ग्रामीणों के लिए मजबूरी में सहारा बनी, लेकिन अब यही उनके लिए खतरे का कारण बन गई है। ट्रॉली को रस्सी के सहारे हाथों से खींचकर नदी पार करनी पड़ती है। कई बार दूसरी तरफ ट्रॉली खींचने के लिए कोई व्यक्ति उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों के लिए नदी पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
तीन गांवों के सैकड़ों लोग इसी रास्ते पर निर्भर
फलाचन घाटी के कमेडा, मझली और मशियार सहित आसपास के गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। स्कूली बच्चे स्कूल जाने के लिए, महिलाएं दूध बेचने और अन्य कामों के लिए, किसान अपनी उपज लेकर तथा बुजुर्ग और मरीज इलाज के लिए इसी मार्ग से नदी पार करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर तेज बहाव वाली फलाचन नदी और दूसरी ओर असुरक्षित ट्रॉली के बीच आवाजाही करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। छात्रा की दो उंगलियां कटने की घटना ने एक बार फिर प्रशासन की अस्थायी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1 अगस्त को डीसी को सौंपा था ज्ञापन
फलाचन वैली युवक मंडल, मशियार ने 1 अगस्त को उपायुक्त कुल्लू को ज्ञापन सौंपकर दोगड़ा में जर्जर अस्थायी व्यवस्था के स्थान पर तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करवाने तथा फलाचन नदी पर स्थायी पुल बनाने की मांग की थी।
युवक मंडल ने प्रशासन को चेताया था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद इस समस्या को लेकर समाचार भी सामने आया। वहीं, हाल में हुई भारी बारिश के कारण एक पुल और दो अस्थायी पुलिया बह जाने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई।
स्थायी पुल को मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया का इंतजार
लोक निर्माण विभाग बंजार के अनुसार दोगड़ा में फलाचन नदी पर वाहन योग्य पुल के निर्माण को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) चरण-4 के तहत मंजूरी मिल चुकी है। विभाग की ओर से बताया गया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थायी पुल का निर्माण शुरू किया जा सकेगा।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुल के निर्माण में समय लग सकता है। ऐसे में जब तक पुल तैयार नहीं होता, तब तक प्रशासन को लोगों की सुरक्षा के लिए मजबूत अस्थायी पैदल पुल का निर्माण करवाना चाहिए।
‘किसी बड़े हादसे का इंतजार न करे प्रशासन’
स्थानीय निवासी मोती राम, पूर्ण चंद, भाग सिंह, तेजस्वी ठाकुर, अमर भारती, रुपेंद्र ठाकुर, नील चंद और हरीश ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से तत्काल सुरक्षित अस्थायी पुल बनाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए मौजूदा रज्जु मार्ग और ट्रॉली पर निर्भरता खत्म करना जरूरी है। उनका आरोप है कि किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को अभी ठोस कदम उठाने चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर भी सुरक्षित रास्ते से महरूम ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा कि जब देश स्वतंत्रता दिवस पर विकास और तरक्की का उत्सव मना रहा था, उसी दिन फलाचन घाटी की एक छात्रा को असुरक्षित आवाजाही की कीमत अपनी दो उंगलियां गंवाकर चुकानी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही असुरक्षित व्यवस्था का गंभीर परिणाम है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि फलाचन नदी पर तत्काल सुरक्षित अस्थायी पैदल पुल बनाया जाए और स्थायी पुल के निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि घाटी के लोगों को सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सके।
फोटो कैप्शन : फलाचन नदी पर ग्रामीणों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल किया जा रहा रज्जु मार्ग और लोहे की ट्रॉली।
