गुशैणी/बंजार (परस राम भारती)। स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर बंजार में आयोजित समारोह में सामाजिक संस्था सहारा (SAHARA) के लंबे समय से चल रहे जनहित, पर्यावरण संरक्षण, वन अधिकार और सामुदायिक विकास के कार्यों को प्रशासन ने सम्मानित किया। संस्था के निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को उल्लेखनीय सामाजिक कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान बंजार के उपमंडलाधिकारी पंकज शर्मा ने प्रदान किया। प्रशस्ति पत्र में वन अधिकार अधिनियम-2006 के क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता तथा उपमंडल और जिला स्तरीय समितियों के साथ समन्वय के लिए सहारा के प्रयासों की सराहना की गई।
वर्ष 2000 से जनहित के कार्यों में सक्रिय
सहारा की शुरुआत वर्ष 2000 के आसपास ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के साथ साझेदार संगठन के रूप में हुई थी। संस्था का उद्देश्य इको-जोन क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए सतत आजीविका के अवसर विकसित करना रहा। प्रारंभिक दौर में महिलाओं के बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ संस्था ने सामुदायिक स्तर पर अपने कार्यों का विस्तार किया।
वर्ष 2002 से 2004 के बीच सहारा ने स्थानीय समुदाय और पूर्व विधायक दिलाराम शबाब के साथ मिलकर तीर्थन नदी को प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं से बचाने के लिए अभियान चलाया। संस्था इस मामले में शिमला हाईकोर्ट में सह-याचिकाकर्ता भी रही।
वर्ष 2005 में संस्था ने सैंज-रोपा/साई रोपा में वर्ल्ड माउंटेन पीपल एसोसिएशन के सम्मेलन का आयोजन किया तथा सिक्किम में आयोजित सम्मेलन में भी भागीदारी की।
निहारनी जनसुनवाई में निभाई भूमिका
वर्ष 2013-14 के दौरान सहारा ने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और विश्व धरोहर स्थल के गठन एवं प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर UNESCO के साथ संवाद और पैरवी की। संस्था के अनुसार, इन प्रयासों के प्रमुख परिणामों में निहारनी जनसुनवाई भी शामिल रही।
वन अधिकार कानून बना प्रमुख कार्यक्षेत्र
वर्ष 2014 के बाद सहारा ने बंजार विकासखंड में वन अधिकार अधिनियम-2006 के क्रियान्वयन को अपने प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल किया। संस्था ने ग्रामीणों को वन अधिकारों के प्रति जागरूक करने, दावों की प्रक्रिया समझाने तथा उपमंडल स्तरीय समिति (SDLC) और जिला स्तरीय समिति (DLC) के साथ समन्वय एवं संवाद में सहयोग किया।
संस्था के अनुसार, वर्तमान में भी ग्राम स्तर पर वन अधिकार कानून से संबंधित कार्य, वन अधिकार समितियों का गठन एवं प्रशिक्षण, सामुदायिक वन अधिकार (CFR) दावों की प्रक्रिया तथा देवस्थलों और वनों से जुड़े दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है।
सहारा के मुताबिक वर्ष 2022-23 के दौरान ग्राम सभाओं को 24 सामुदायिक वन अधिकार दावों के अधिकार-पत्र प्राप्त हुए। CFR प्रक्रिया के तहत Google Earth के माध्यम से देवस्थलों की मैपिंग भी की गई। इसके अलावा वन अधिकार समितियों के गठन और क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
महिला सशक्तिकरण और सतत पर्यटन पर भी जोर
सहारा ने महिला बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी काम किया। वहीं तीर्थन घाटी और आसपास के क्षेत्रों में सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विजन दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में सहयोग किया गया।
संस्था की ओर से प्रशासन और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर क्षेत्र में निर्माण कार्यों को व्यवस्थित एवं विनियमित करने को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल, ज्ञापन और पत्राचार किए गए। संस्था के कार्य विवरण के अनुसार, इसके बाद चार पंचायतों ने पंचायती राज अधिनियम-1994 के तहत निर्माण कार्यों को विनियमित करने के लिए मॉडल प्लान तैयार किए।
कोविड काल में प्रशासन का किया सहयोग
कोविड-19 महामारी के दौरान सहारा ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से स्वैच्छिक रूप से मास्क तैयार करने और उनके वितरण में योगदान दिया। संस्था की ओर से आम जनता और प्रशासन के लिए मास्क, M-95 मास्क तथा सैनिटाइजर उपलब्ध करवाने में सहयोग किया गया।
कोविड काल में वाहनों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी प्रशासन को सहयोग देने की बात संस्था ने कही है। संस्था ने इस दौरान पुलिस विभाग से मिले सहयोग के लिए भी आभार जताया।
बाढ़ प्रभावित 33 परिवारों तक पहुंचाई राहत
वर्ष 2024-25 में आई भीषण बाढ़ के दौरान सहारा ने प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए राहत कार्य किए। संस्था के अनुसार, प्रभावित 33 घरों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई तथा राशन, कंबल और तिरपाल जैसी आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया गया।
इससे स्पष्ट है कि संस्था की गतिविधियां केवल पर्यावरण और वन अधिकारों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आपदा के समय जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने और सामुदायिक सहयोग में भी इसकी भूमिका रही।
प्रशस्ति पत्र में कार्यों की विशेष सराहना
बंजार प्रशासन की ओर से दिए गए प्रशस्ति पत्र में सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता और SDLC तथा DLC के साथ समन्वय के माध्यम से वन अधिकार दावों के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निपटारे की दिशा में सहारा के प्रयासों की विशेष सराहना की गई।
प्रशस्ति पत्र में सामुदायिक वन संसाधन (CFR) दावों की मान्यता, वन अधिकार समितियों के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, सतत पर्यटन और सामुदायिक कल्याण से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। प्रशासन ने राजेंद्र सिंह चौहान के समर्पण और सेवा भावना को सराहनीय बताते हुए इसे अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक बताया।
सहारा ने प्रशासन और सहयोगियों का जताया आभार
सम्मान मिलने के बाद सहारा संस्था ने अपने सभी शुभचिंतकों, सहयोगियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। संस्था ने विशेष रूप से बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा का धन्यवाद करते हुए कहा कि वर्षों से किए जा रहे जनहित के कार्यों का प्रशासन की ओर से मूल्यांकन कर सम्मानित किया जाना संस्था के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का विषय है।
