धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में पहली बार प्राकृतिक ड्रैगन फ्रूट से जैम तैयार किया गया है। राज्य सरकार के प्रोत्साहन और उद्यान विभाग की तकनीकी मदद से किसान उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, ब्लूबेरी, कीवी और स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में कांगड़ा के नगरोटा बगवां स्थित फल डिब्बाबंदी केंद्र में पहली बार प्राकृतिक ड्रैगन फ्रूट से जैम तैयार किया गया है। इसे ड्रैगन फ्रूट की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
उच्च मूल्य वाली फसलों पर 50 फीसदी सब्सिडी
राज्य सरकार मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा दे रही है। योजना के तहत किसान ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, ब्लूबेरी, कीवी और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों की खेती के लिए 50 फीसदी तक सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।
कांगड़ा जिले के फतेहपुर, नूरपुर, देहरा, इंदौरा और सुलह विकास खंडों के अलावा ऊना जिले में भी किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती अपना रहे हैं।
23 किलो ड्रैगन फ्रूट से तैयार किया जैम
सेवानिवृत्त व्याख्याता जीवन सिंह राणा और उनके पुत्र आशीष सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। छोटे आकार और अतिरिक्त उत्पादन वाले फलों की बिक्री में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क किया।
इसके बाद नगरोटा बगवां के फल डिब्बाबंदी केंद्र में उनकी प्राकृतिक उपज से करीब 23 किलोग्राम ड्रैगन फ्रूट जैम तैयार किया गया। सामुदायिक डिब्बाबंदी सेवा के तहत विभाग आवश्यकता के अनुसार केवल 50 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम का प्रसंस्करण शुल्क लेता है।
जीवन सिंह राणा ने तैयार जैम की गुणवत्ता और स्वाद पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बताया।
500 पौधों से शुरू हुआ सफर, अब 5000 पौधों तक पहुंचा
जीवन सिंह राणा और आशीष सिंह राणा ने शुरुआत में प्राकृतिक खेती पद्धति से करीब 500 ड्रैगन फ्रूट पौधों के साथ प्रयोग शुरू किया था। मेहनत और विभागीय मार्गदर्शन से आज उन्होंने अपने 35 कनाल क्षेत्र में करीब 5000 पौधों तक खेती का विस्तार कर लिया है।
उनके प्रयासों को प्रदेश में प्राकृतिक खेती के माध्यम से ड्रैगन फ्रूट को बढ़ावा देने वाले सफल मॉडल के रूप में पहचान मिली है।
प्रदेश की पहली पंजीकृत ड्रैगन फ्रूट नर्सरी
उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में जीवन सिंह राणा ने प्रदेश की पहली पंजीकृत ड्रैगन फ्रूट नर्सरी स्थापित की। इससे अन्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित ड्रैगन फ्रूट पौधे उपलब्ध करवाने में मदद मिल रही है।
वैल्यू एडिशन से कम होगा फलों का नुकसान
उद्यान विभाग का जोर किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से जोड़ने पर है। इससे छोटे आकार के, अतिरिक्त और बाजार में नहीं बिक पाने वाले फलों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
संयुक्त निदेशक उद्यान कांगड़ा डॉ. कमल शील नेगी ने खेत का दौरा कर किसानों को तकनीकी सलाह और नर्सरी प्रबंधन संबंधी मार्गदर्शन दिया। वहीं नगरोटा बगवां के विषय विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार नेगी ने ड्रैगन फ्रूट जैम तैयार करने में तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
जीवन सिंह राणा ने उद्यान विभाग के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार की किसान-केंद्रित नीतियां और प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
