122.45 करोड़ रुपये की लागत से 80 स्थानों पर स्थापित हो रहे चार्जिंग स्टेशन : मुकेश अग्निहोत्री

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एएम नाथ। शिमला: हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से मजबूत किया जा रहा है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की ओर से 122.45 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश में 80 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।

उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने एचआरटीसी के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक 34 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 21 स्थानों पर आगामी एक माह के भीतर काम पूरा कर लिया जाएगा। शेष 25 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।

99 चार्जिंग प्वाइंट किए जा रहे स्थापित

मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि प्रदेश के 80 स्थानों पर कुल 99 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें 180 किलोवाट क्षमता वाले फास्ट CCS-2 चार्जर लगाए जा रहे हैं। ये चार्जिंग स्टेशन एचआरटीसी के विभिन्न बस अड्डों और वर्कशॉप में स्थापित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चार्जिंग नेटवर्क को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार भविष्य में अन्य स्थानों पर भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे इलेक्ट्रिक बसों के विभिन्न रूटों पर संचालन को और गति मिलेगी।

297 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में निगम के बेड़े में शामिल 297 इलेक्ट्रिक बसें छोटे और लंबे रूटों पर सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से निगम को डीजल खर्च में प्रति किलोमीटर करीब 15 से 16 रुपये की बचत हो रही है। इससे निगम के परिचालन खर्च को कम करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ उनके लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार प्रदेश में आधुनिक, किफायती और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

180 किलोमीटर की सामान्य रेंज

मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसें सामान्य तौर पर एक बार चार्ज करने के बाद करीब 180 किलोमीटर तक चल सकती हैं। हालांकि, हरोली-चंडीगढ़ के लगभग 270 किलोमीटर लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्जिंग के बाद सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

इसी तरह शिमला-चंडीगढ़-शिमला के करीब 250 किलोमीटर लंबे रूट पर भी इलेक्ट्रिक बस लगभग 25 प्रतिशत बैटरी शेष रहते हुए यात्रा पूरी कर रही है।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए आवश्यक सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है, ताकि प्रदेशवासियों और पर्यटकों को अधिक बेहतर, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके।

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