गुलजार सिंह के अंतिम संस्कार पर हंगामा, ग्रामीणों ने रुकवाई चिता ; नौकरी-मुआवजे के भरोसे के बाद बनी सहमति

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नशे की बिक्री को लेकर वित्त मंत्री हरपाल चीमा से सवाल पूछने के बाद जहर खाने वाले गुलजार की मौत का मामला गरमाया

संगरूर। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से गांव में नशे की कथित खुलेआम बिक्री को लेकर सवाल पूछने के बाद जहर खाने वाले गुलजार सिंह की मौत का मामला तूल पकड़ गया है। मंगलवार को गुलजार सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट में ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए संस्कार रुकवा दिया। ग्रामीणों ने चिता के लिए सजाई गई लकड़ियां तक उठाकर फेंक दीं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा गुलजार सिंह का जबरन अंतिम संस्कार करवाने की कोशिश की जा रही थी। उनका यह भी आरोप था कि परिवार को मृतक का अंतिम बार चेहरा तक नहीं दिखाया गया और न ही शव को घर ले जाकर अंतिम स्नान करवाने दिया गया।

हालांकि बाद में प्रशासन और परिवार के बीच सहमति बन गई। परिवार को एक सदस्य को सरकारी नौकरी और मुआवजा देने का भरोसा दिए जाने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

बेटे ने कहा- प्रशासन ने कोई धक्का नहीं किया

गुलजार सिंह के बेटे ने बाद में कहा कि प्रशासन की ओर से परिवार के साथ कोई धक्का नहीं किया गया। उसने बताया कि मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी को भी जल्द गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई है।

मौत से पहले सामने आया वीडियो बना विवाद का केंद्र

गुलजार सिंह की मौत से पहले सामने आए एक वीडियो ने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से गर्म कर दिया है। वीडियो में गुलजार सिंह ने अपनी मौत के लिए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को भी जिम्मेदार बताया था।

हालांकि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने मंगलवार को दावा किया कि इस मामले से जुड़े दो वीडियो सामने आए हैं और पहले वीडियो में किसी मंत्री का नाम नहीं लिया गया है।

ढांडा ने आरोप लगाया कि जहर खाने के बाद गुलजार सिंह को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय उस पर दबाव डालकर दोबारा वीडियो बनवाया गया और मंत्री का नाम लेने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की।

सरपंच और उसके पति समेत अन्य पर केस

पुलिस ने महिला सरपंच बलजिंदर कौर, उनके पति बलजिंदर सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सरपंच के पति बलजिंदर सिंह को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी गुलजार सिंह की मौत का संज्ञान लिया है। आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इसकी पुष्टि की है।

6 सितंबर को मंत्री के सामने उठाया था नशे का मुद्दा

बताया जा रहा है कि 6 सितंबर को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा तूर बंजारा गांव में लोगों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान किसान गुलजार सिंह ने उनसे मुलाकात कर अपने बेटे और गांव के कुछ अन्य युवाओं के कथित तौर पर ‘चिट्टा’ नशे की गिरफ्त में होने की बात कही थी।

परिवार का आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री से नशे की बिक्री पर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद गांव की सरपंच और पंच से जुड़े लोगों के उसके घर पहुंचने तथा मंत्री से माफी मांगने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया।

परिवार के मुताबिक, इसी घटनाक्रम के बाद गुलजार सिंह ने 7 सितंबर को जहर खा लिया।

अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत

जहर खाने के बाद हालत बिगड़ने पर गुलजार सिंह को पहले संगरूर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से उसे पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर किया गया। परिवार के अनुसार, पटियाला में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के बाद उसे वापस संगरूर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रात करीब 11 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


गुलजार सिंह की मौत पर AAP का पक्ष

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मंत्री के सामने अपनी समस्या रखता है, तो यह इस बात का संकेत है कि उसे सरकार पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह की शिकायत के बाद जिन लोगों के नाम सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और गिरफ्तारियां हुई हैं।

ढांडा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति इतनी संवेदनहीन नहीं होनी चाहिए कि किसी व्यक्ति की मौत को राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी और जांच में जिसका भी नाम सामने आएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

उन्होंने पिछली अकाली-भाजपा सरकार पर भी नशे के मुद्दे को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उस समय नशे के कारोबार को संरक्षण दिया जाता था।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग भी शिकायत मिलने पर करेगा जांच

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि आयोग को अभी तक गुलजार सिंह की मौत से संबंधित कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर आयोग नियमों के अनुसार मामले की जांच करेगा।


विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस ने की हरपाल चीमा के इस्तीफे की मांग

पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की मांग की।

बाजवा ने आरोप लगाया कि 6 सितंबर को मंत्री के गांव दौरे के दौरान गुलजार सिंह ने उनके नशे के खिलाफ किए जा रहे दावों पर सवाल उठाया था। इसके बाद कथित तौर पर उस पर मंत्री से माफी मांगने का दबाव बनाया गया।

बाजवा ने आरोप लगाया कि दबाव बढ़ने के बाद गुलजार सिंह ने मंत्री का नाम लेते हुए वीडियो बनाया और बाद में सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। कांग्रेस ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

चरणजीत चन्नी ने मंत्री के खिलाफ FIR की मांग की

पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह ने मंत्री के गांव दौरे के दौरान अपने बेटे के नशे की लत और नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाया था।

चन्नी ने दावा किया कि इसके बाद गुलजार सिंह पर दबाव बनाया गया और उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने वित्त मंत्री और सरपंच के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

BJP ने भी सरकार को घेरा

भाजपा नेता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह ने मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने गांव में चिट्टे की समस्या उठाई थी और कार्रवाई की मांग की थी।

भाटिया के अनुसार, मंत्री के जाने के बाद सत्तारूढ़ दल से जुड़े स्थानीय लोगों ने गुलजार सिंह पर मंत्री से माफी मांगने का दबाव बनाया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद गुलजार सिंह ने जहर खा लिया और मौत से पहले वीडियो बनाकर पंजाब में नशे की स्थिति के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराया।

मामले की जांच से साफ होगी सच्चाई

गुलजार सिंह की मौत को लेकर परिवार, ग्रामीणों, विपक्ष और आम आदमी पार्टी की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की है, जबकि मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। ऐसे में अब जांच और सामने आए वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गुलजार सिंह की मौत से पहले वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ था।

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