चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने विपक्षीय पार्टियों पर एक साथ तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दल वर्षों से शिरोमणि अकाली दल, बादल परिवार और सिख संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश रचते रहे हैं।
जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड, बेअदबी, सिख संस्थाओं, एसजीपीसी, श्री अकाल तख्त साहिब और पंजाब की राजनीति का जिक्र करते हुए बादल ने दावा किया कि कांग्रेस और आप ने दोषियों को बचाने का प्रयास किया, जबकि अकाली दल और एसजीपीसी ने न्याय की लड़ाई लड़ी। मैं सुखबीर सिंह बादल हूं। न मैं डरता हूं, न मेरे पिता प्रकाश सिंह बादल कभी डरे और न हम भविष्य में किसी के दबाव में झुकेंगे।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब में लंबे समय से सच को दबाकर झूठ को सच के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली आधारित राजनीतिक दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति और अकाली दल को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने शहीद जसवंत सिंह खालड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ से जुड़े थे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच कर रहे थे। बादल के अनुसार खालड़ा ने अस्पतालों और श्मशान घाटों के रिकॉर्ड जुटाकर हजारों कथित लापता और मारे गए युवाओं से जुड़े दस्तावेज सामने लाने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण 6 सितंबर 1995 को उनका अपहरण किया गया।
एसजीपीसी ने की थी राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
बादल ने दावा किया कि घटना के बाद एसजीपीसी ने तत्काल राष्ट्रपति और न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग की तथा मामला अदालतों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई।
उनके अनुसार कांग्रेस सरकार के दौरान गवाहों को सामने नहीं आने दिया गया, जबकि 1997 में अकाली दल की सरकार बनने के बाद मुख्य गवाह को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई और उसकी गवाही के आधार पर डीएसपी से लेकर एसएचओ स्तर तक के अधिकारियों को दोषी ठहराया गया।
उन्होंने कहा कि पूरे मुकदमे का खर्च एसजीपीसी ने उठाया, गवाह को नौकरी और आर्थिक सहायता भी दी। बादल का दावा था कि कांग्रेस और बाद में आम आदमी पार्टी सरकार ने दोषी अधिकारियों की समयपूर्व रिहाई (प्रीमैच्योर रिलीज) की कोशिश की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का लाभ दिलाने के लिए जानबूझकर फाइलें लंबित रखी गईं ताकि दोषियों को पैरोल या जमानत का रास्ता मिल सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक दोषी पैरोल पर बाहर आने के बाद वापस नहीं लौटा। सुखबीर बादल ने कहा कि उनके पास इस पूरे मामले से जुड़े सभी सरकारी पत्र, अदालती रिकॉर्ड और दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ने अलग-अलग समय में दोषियों को राहत दिलाने का प्रयास किया।
उन्होंने यह भी कहा कि उन पर और अकाली दल पर जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फिल्म को रोकने का झूठा आरोप लगाया गया। बादल ने कहा कि उन्होंने 2023 में सार्वजनिक रूप से ट्वीट कर कहा था कि फिल्म को नहीं रोका जाना चाहिए और इसे लेकर फैलाया जा रहा प्रचार पूरी तरह गलत है। संस्थाओं को कमजोर करने के साथ-साथ सिख संस्थाओं पर भी नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को इसी रणनीति के तहत प्रभावित किया गया तथा अंतिम लक्ष्य शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को कमजोर करना है।
सुखजिंदर रंधावा पर किया पलटवार : कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा पर पलटवार करते हुए बादल ने कहा कि कांग्रेस नेता अकाली दल पर आरोप लगाते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि उनकी सरकारों ने दोषियों को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए।उन्होंने कहा कि अकाली दल ने अदालतों में लड़ाई लड़ी, गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की और दोषियों को सजा दिलाने में भूमिका निभाई, जबकि विरोधी दल राजनीतिक बयानबाजी करते रहे। बादल ने कहा कि पिछले दस वर्षों से उनके और बादल परिवार के खिलाफ लगातार राजनीतिक अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन वह न कभी दबाव में आए हैं और न आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि अकाली दल सिख संस्थाओं, पंजाब के अधिकारों और धार्मिक मर्यादा की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
