हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, विशेषज्ञ समिति गठित

by

प्रत्येक सरकारी मेडिकल कॉलेज में 2 से 4 स्पेशलाइज्ड विभागों की होगी पहचान; दो सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

शिमला, 19 सितंबर: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी (एआईएमएसएस), चमियाणा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के प्रस्ताव का निरीक्षण करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है।

सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ सेवाएं, उन्नत उपचार सुविधाएं और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जटिल, दुर्लभ और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विशेषीकृत तथा बहु-विषयक उपचार सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे मरीजों को उन्नत इलाज के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत कम होगी।

हर मेडिकल कॉलेज में 2 से 4 विभागों की पहचान

विशेषज्ञ समिति प्रत्येक सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिसमें एआईएमएसएस चमियाणा भी शामिल है, में दो से चार विभागों की पहचान करेगी, जिन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा सकता है। इन केंद्रों में ऐसी गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार की व्यवस्था विकसित करने पर जोर होगा, जिनके लिए सामान्य विभागीय सेवाओं से आगे की विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है।

समिति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए आवश्यक आधुनिक चिकित्सा तकनीक, बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ मानव संसाधन, उपकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधनों का भी आकलन करेगी।

डॉ. डी.के. वर्मा होंगे समिति के अध्यक्ष

अटल मेडिकल रिसर्च यूनिवर्सिटी नेरचौक, मंडी के कुलपति डॉ. डी.के. वर्मा विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान डॉ. गोपाल बेरी, टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा, एआईएमएसएस चमियाणा के प्रधानाचार्य डॉ. बृज शर्मा, आईजीएमसी शिमला के प्रोफेसर (जनरल मेडिसिन) डॉ. बलबीर वर्मा तथा प्रोफेसर (जनरल सर्जरी) डॉ. पुनीत महाजन सदस्य होंगे।

एसएलबीएसजीएमसी नेरचौक, मंडी के अतिरिक्त/संयुक्त निदेशक समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

दो सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश में तृतीयक और सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा। समिति को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार के अनुसार, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होने से आधुनिक तकनीक और विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के समन्वय से विशेषीकृत उपचार केंद्र विकसित किए जा सकेंगे। इससे चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और लक्षित अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने कहा है कि प्रदेश के भीतर ही उन्नत और बहु-विषयक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रस्तावित केंद्रों से मरीजों को अपने क्षेत्र के नजदीक विशेषज्ञ उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

जनगणना-2027 के प्रथम चरण के लिए जिला बिलासपुर में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू

बिलासपुर 05 मार्च : जिला बिलासपुर में जनगणना-2027 के प्रथम चरण ‘गृह सूचीकरण कार्य’ के सफल संचालन के लिए तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ डीआरडीए सभागार में निदेशक एवं मुख्य प्रधान...
हिमाचल प्रदेश

राशन कार्ड धारक 15 अगस्त तक करवाएं अपना ईकेवाईसी: राजीव शर्मा

ऊना :16 जुलाई: जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, ऊना राजीव शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला में उचित मूल्य की दुकान धारकों द्वारा उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी की जा रही...
article-image
हिमाचल प्रदेश

सीएम बोले, छोटे भाई हैं विक्रमादित्य, नाराजगी को दूर करेंगे

एएम नाथ। शिमला :   हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह का इस्तीफा स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य सिंह उनके...
article-image
हिमाचल प्रदेश

केवी सलोह में नई शिक्षा नीति पर कार्यशाला हुई आयोजित

ऊना, 15 जून – केन्द्रीय विद्यालय सलोह में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्देशित जनभागीदारी गतिविधियों के अंतर्गत एक कार्यशाला का आयोजन किया गय। यह जानकारी देते हुए केंद्रीय विद्यालय सलोह के प्राचार्य युधवीर...
Translate »
error: Content is protected !!