कार्यशाला में चिकित्सकों ने चंबा की प्राकृतिक संपदा और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान को सराहा
सुरेंद्र भवानी। चंबा : पाँच दिवसीय इलैक्ट्रोहोम्योपैथी कार्यशाला के चौथे दिन विशेषज्ञों ने विभिन्न रोगों और उनके उपचार से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उत्तर प्रदेश के औरैया स्थित साक्षी इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक संस्थान के निदेशक डॉ. विजय सेंगर ने कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में बांझपन और कैंसर जैसे गंभीर रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसके लिए असंतुलित भोजन और बदलती दिनचर्या को प्रमुख कारणों में शामिल बताया।
डॉ. सेंगर ने कहा कि खान-पान और जीवनशैली में बदलाव का असर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक और भावनात्मक विकास पर भी पड़ रहा है। उन्होंने इलैक्ट्रोहोम्योपैथी के माध्यम से बांझपन जैसे रोगों के उपचार की संभावना का दावा किया। कार्यशाला में इस चिकित्सा पद्धति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि इलैक्ट्रोहोम्योपैथी को भारत सरकार की शासकीय सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक सरकारी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया चल रही है। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से पहुंचे चिकित्सकों और प्रतिभागियों ने चिकित्सा पद्धति से संबंधित विषयों पर चर्चा की।
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बोटेनिकल गार्डन के भ्रमण के दौरान चिकित्सकों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में शामिल चिकित्सकों ने बोटेनिकल गार्डन का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्होंने चंबा की प्राकृतिक संपदा और वनस्पतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने भ्रमण को उपयोगी बताते हुए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने चंबा की प्राकृतिक परिस्थितियों और चिकित्सा पद्धति के विकास में क्षेत्र की भूमिका की सराहना की।
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चिकित्सकों और संस्थानों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान रबिसन इंडिया फाउंडेशन की ओर से देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और चिकित्सकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। पंजाब के मोगा जिले से डॉ. परमजीत सिंह सिधू और तरनतारण से डॉ. सरबजीत सिंह को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
