रोहित जसवाल। शिमला/नई दिल्ली, 29 सितंबर। हिमाचल प्रदेश में स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर तक शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों का मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सामने प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा की गुणवत्ता, मेरिट आधारित भर्ती, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटल शिक्षा और रोजगारपरक पाठ्यक्रम को सरकार के शिक्षा सुधार मॉडल का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल स्कूलों के विस्तार पर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर है।
सुक्खू ने बताया कि शिक्षा के राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन में हिमाचल की स्थिति में सुधार हुआ है और प्रदेश की रैंकिंग 21वें स्थान से पांचवें स्थान तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि अब सीखने के परिणाम, शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चयनित सरकारी स्कूलों को CBSE से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
आधुनिक सुविधाओं से विकसित होंगे डे बोर्डिंग स्कूल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के साथ विकसित किया जा रहा है। इन परिसरों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ खेल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना भी शिक्षा सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी भी मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय भर्ती में मेरिट और पारदर्शिता पर जोर
सुक्खू ने विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर सरकार के प्रस्तावित बदलावों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में मेरिट और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों में भर्तियां लोकसेवा आयोग के माध्यम से कराने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
कुलपति नियुक्ति विधेयकों पर राज्यपाल से मतभेद का मुद्दा उठा
बैठक में विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति से जुड़े विधेयकों के राजभवन में लंबित रहने का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों को लागू करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
