BJP ने 2027 के विधानसभा चुनाव में नशे को प्रमुख मुद्दा बनाने के दिए संकेत, कांग्रेस की गुटबाजी पर भी साधा निशाना
चंडीगढ़, 1 अक्तूबर। पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 सितंबर को जालंधर में BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन समारोह में कहा कि यदि पंजाब में BJP की सरकार बनती है तो 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को ‘चिट्टा’ मुक्त किया जाएगा। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में नशे के मुद्दे को BJP के प्रमुख चुनावी एजेंडे के रूप में सामने रखा।
BJP के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया ने शाह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि “अमित शाह जो कहते हैं, करके दिखाते हैं।” पूनिया के अनुसार पंजाब में नशे के खिलाफ पार्टी का अभियान आगे भी जारी रहेगा और यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
शाह ने अपनी जालंधर रैली में पंजाब की AAP सरकार पर नशे के कारोबार को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था। दूसरी ओर, AAP ने BJP के दावों पर पलटवार करते हुए केंद्र की कार्रवाई और गुजरात में हाल में हुई बड़ी नशीले पदार्थों की बरामदगी को लेकर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस की गुटबाजी पर निशाना
पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान को लेकर पूनिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी लगातार गुटबाजी से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बीच आपसी मतभेदों का असर संगठन और उसकी राजनीतिक स्थिति पर पड़ रहा है।
कैप्टन अमरिंदर को बताया महत्वपूर्ण नेता
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर पूनिया ने कहा कि वह BJP के लिए महत्वपूर्ण वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का सम्मान करती है। उन्होंने कैप्टन के साथ बातचीत होने का भी उल्लेख किया और उनकी भूमिका को मार्गदर्शक के तौर पर बताया।
कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना
पूनिया ने फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गंभीर परिस्थितियों के बावजूद कैप्टन ने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। पूनिया ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
4 हजार किलोमीटर चली ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’
BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ 18 सितंबर को पठानकोट से शुरू हुई थी और 13 दिनों के दौरान सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त हुई। शाह ने इसी समापन रैली में 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा’ मुक्त करने का लक्ष्य घोषित किया।
