9 अक्टूबर को KAP सिन्हा को व्यक्तिगत पेशी के आदेश
चंडीगढ़, 6 अक्तूबर। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया महंगाई भत्ते (DA) के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) की स्थिति को लेकर अदालत के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया।
मंगलवार को चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को 9 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए। साथ ही उनसे हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा गया है कि कथित रूप से गलत तथ्य प्रस्तुत करने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव स्वयं अदालत में मौजूद थे।
SLP की खामियों को लेकर कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट सनी सिंगला के अनुसार, हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP की स्थिति को लेकर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार SLP में बताई गई खामियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्थिति मुख्य सचिव की ओर से सोमवार को दिए गए उस बयान से अलग है, जिसमें बताया गया था कि सरकार ने खामियां दूर कर SLP दोबारा दाखिल कर दी है। इसी विरोधाभास पर कोर्ट ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा।
बेंच ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत के सामने तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि कोर्ट को गुमराह करने और गलत दावे करने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
सरकार की ओर से ‘बेंच हंटिंग’ का तर्क
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि 3 अगस्त के फैसले के अनुपालन से जुड़ी अवमानना याचिका पहले ही एकल पीठ के समक्ष लंबित है। ऐसे में उनके अनुसार डिवीजन बेंच के समक्ष इन आवेदनों पर आगे कार्रवाई नहीं हो सकती।
विकास सिंह ने आवेदकों पर ‘बेंच हंटिंग’ का आरोप भी लगाया। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें अदालत में दिए जा रहे बयानों को लेकर सावधानी बरतने को कहा। सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित तरीके से उठाया जा रहा है।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले के राजनीतिक पहलुओं में नहीं जाएगा और उसका ध्यान कानून तथा अदालत के आदेशों के अनुपालन पर है।
‘कानून के शासन के तहत चलेगा कोर्ट’
बेंच ने कहा कि राज्य सरकार को SLP दाखिल करने और सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देने का अधिकार है, लेकिन इस प्रक्रिया में अदालत के आदेशों के अनुपालन से बचने की स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को SLP की खामियां दूर करने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। बेंच ने टिप्पणी की कि अपील दाखिल करने या उसमें मौजूद खामियां दूर करने में कुछ दिन या एक सप्ताह लग सकता है, लेकिन इसके लिए अनिश्चित समय नहीं लिया जा सकता।
कर्मचारियों-पेंशनर्स के बकाए का मामला
हाईकोर्ट ने कहा कि वह किसी सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया अधिकारों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि ये वही कर्मचारी हैं जिन्होंने वर्षों तक सरकार की सेवा की है और अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के रवैये को देखते हुए उसे मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
9 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
कोर्ट के आदेश के अनुसार मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को 9 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि कथित गलत तथ्य प्रस्तुत करने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार, 9 अक्टूबर को होगी।
