राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में FIR बरकरार; सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार को झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए मामले में फिलहाल आरोपियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। <Cite refs={[“turn791791search0″,”turn791791search3”]}/>
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले शामिल थे, ने पंजाब सरकार से जांच में सहयोग करने को कहा। अदालत के आदेश का अर्थ है कि एफआईआर रद्द नहीं हुई है और सीबीआई की जांच जारी रह सकती है, जबकि अंतरिम संरक्षण के दौरान आरोपियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए जा सकेंगे। <Cite refs={[“turn791791search2″,”turn791791search4”]}/>
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई थी FIR
यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से उठाए गए आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज करने और जांच करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सीबीआई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपों में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर और अन्य प्रशासनिक मामलों में कथित अनुचित हस्तक्षेप के बदले आर्थिक लाभ लेने की आशंका शामिल है। सीबीआई ने चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय सहित कई स्थानों पर तलाशी भी ली थी। ये सभी आरोप जांच के अधीन हैं। <Cite refs={[“turn791791search7″,”turn791791search9”]}/>
पंजाब सरकार ने दी थी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच पर रोक लगाने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने फिलहाल जांच रोकने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार किया जाएगा।
