केजरीवाल पर पंजाब के मुख्यमंत्री को काम न करने देने का आरोप; 2029 तक राज्य से नशे का कारोबार खत्म करने का दोहराया संकल्प
नई दिल्ली, 22 अक्तूबर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनेगी। दिल्ली में यमुना पुनरुद्धार योजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिए गए उनके इस बयान के बाद पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, शाह के बयान से दोनों दलों के बीच गठबंधन की औपचारिक पुष्टि नहीं होती।
अमित शाह ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता अगले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को जवाब देगी। शाह ने यह भी दोहराया कि 2029 तक पंजाब से नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
शाह ने अपने संबोधन में कहा, “मेरी बात याद रखना। केजरीवाल कान खोलकर सुन लो। बहाने की राजनीति लंबी नहीं चलती है, रिजल्ट लाने पड़ते हैं।” उन्होंने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार का जिक्र करते हुए पंजाब में भी पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए और दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में आप को बड़ा नुकसान होगा।
नशामुक्त पंजाब के मुद्दे पर AAP सरकार को घेरा
अमित शाह ने इससे पहले 30 सितंबर को जालंधर के परागपुर में भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर आयोजित रैली में भी पंजाब सरकार को निशाने पर लिया था। 18 सितंबर को शुरू हुई यह यात्रा राज्य के 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए करीब चार हजार किलोमीटर का सफर तय कर समाप्त हुई थी।
उस रैली में शाह ने कहा था कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनती है, तो 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को चिट्टे और अन्य नशों से मुक्त करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में नाकाम रहने के आरोप भी लगाए थे।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले थे शाह
अमित शाह ने 20 अक्तूबर को पंजाब दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में पीड़ित परिवारों से मिलकर नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। इसके बाद वह लुधियाना में दशहरा समारोह में भी शामिल हुए थे।
कृषि कानूनों के विवाद में टूटा था भाजपा-अकाली गठबंधन
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन करीब 24 साल तक चला था। सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध के बीच अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया था। इससे पहले अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनावी रास्ते अपनाए। वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन किया।
अब अमित शाह के 2027 में NDA सरकार बनने के दावे के बाद पंजाब की राजनीति में भाजपा और अकाली दल के संभावित चुनावी तालमेल को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच किसी नए गठबंधन को लेकर औपचारिक घोषणा के बिना इसे राजनीतिक अटकल ही माना जाएगा।
