बिना काम करवाए फर्जी बिलों से भुगतान लेने का आरोप; कथित फर्जी हस्ताक्षरों से मंजूरी और मेजरमेंट बुक में गलत प्रविष्टियों की भी जांच
चंडीगढ़। । जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग में जलापूर्ति योजना के रखरखाव के नाम पर 24.34 लाख रुपये के कथित गबन के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। नामजद आरोपियों में विभाग के छह अधिकारी-कर्मचारी और तीन ठेकेदार शामिल हैं। आरोप है कि मौके पर काम करवाए बिना ही फर्जी बिल तैयार कर सरकारी राशि का भुगतान करवा लिया गया। विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी विनोद कुमार के अनुसार, मामले की जांच जारी है।
एक्सईएन और एसडीओ समेत नौ लोग नामजद
मामले में एक्सईएन जसविंदर सिंह, एसडीओ संदीप सिंह, जेई परविंदर सिंह, सीनियर असिस्टेंट जस्मित सिंह और तारा सिंह तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह को नामजद किया गया है। इनके अलावा ठेकेदार करनैल सिंह, हरदीप सिंह और जसवीर सिंह के नाम भी शामिल हैं।
रखरखाव के लिए जारी हुए थे 73.36 लाख रुपये
जांच के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2024 को जलापूर्ति योजना के रखरखाव के लिए 73.36 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसके दो दिन बाद, 25 अक्टूबर को सात कार्यों के लिए कोटेशन मांगे गए। प्रत्येक कार्य की शुरुआती अनुमानित लागत 49,900 रुपये बताई गई थी।
आरोप है कि इनमें से छह कार्यों की लागत बढ़ाकर करीब पांच लाख रुपये प्रति कार्य कर दी गई। इन कार्यों को तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुखपिंदर सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर मंजूरी दिलाने का आरोप भी है। बताया गया है कि सुखपिंदर सिंह ने इन हस्ताक्षरों को अपना मानने से इनकार किया था।
तीन दिन में तैयार हुए रिकॉर्ड और जारी हुआ भुगतान
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, कार्य पूरा होने का रिकॉर्ड तैयार कर 28 अक्टूबर को बिल बनाए गए और 29 अक्टूबर को ठेकेदारों के खातों में भुगतान कर दिया गया। अधिकारियों-कर्मचारियों पर बिना मौके का निरीक्षण किए मेजरमेंट बुक में प्रविष्टियां दर्ज करने का आरोप भी है।
विभागीय जांच के बाद विजिलेंस को सौंपा गया मामला
मामले की विभागीय जांच के बाद जनवरी 2025 में एक्सईएन समेत चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद मामला विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा गया। अब नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी विनोद कुमार के अनुसार, जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
