मोगा से AAP विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के 7 ठिकानों पर ED की छापेमारी

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NH-754A के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन के म्यूटेशन और मुआवजा वितरण में कथित गड़बड़ी से जुड़ा मामला; पति के नशा मुक्ति केंद्र पर भी तलाशी, AAP नेताओं ने कार्रवाई के समय पर उठाए सवाल

चंडीगढ़।  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार सुबह ईडी की टीमों ने मोगा से आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा और उनसे जुड़े लोगों के कुल सात ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें विधायक के आवास, परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े परिसर के अलावा उनके पति डॉ. राकेश अरोड़ा से जुड़ा नशा मुक्ति अस्पताल भी शामिल है। कार्रवाई सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई। विधायक उस समय घर पर मौजूद थीं और अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की।

ईडी की टीमें चंडीगढ़ और दिल्ली इकाइयों से संबंधित बताई गई हैं। सुरक्षा के लिए उनके साथ जवान भी तैनात थे। यह जांच मोगा जिले में सरकारी जमीन के कथित फर्जी म्यूटेशन और मुआवजे के गलत भुगतान से जुड़े मामले में की जा रही है। आम आदमी पार्टी ने हाल ही में डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मोगा सीट से दोबारा उम्मीदवार घोषित किया है।

2024 की FIR से जुड़ी है जांच

ईडी ने पंजाब पुलिस की ओर से 16 जून 2024 को दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू की है। मामला नेशनल हाईवे-754A के निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि मोगा जिले में सरकारी जमीन का फर्जी तरीके से म्यूटेशन करवाकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की गई और इसके आधार पर मुआवजे का भुगतान कराया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मूल एफआईआर में पटवारी नवदीप सिंह और निजी लाभार्थी दिलखुश कुमारी के नाम दर्ज हैं। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस एफआईआर में विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और उनके परिवार के सदस्यों के नाम नहीं हैं। ईडी की मौजूदा कार्रवाई में विधायक, उनके पति, परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई है।

छापेमारी को राजनीतिक दबाव से जोड़ रहे करीबी

विधायक के करीबी लोगों ने इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि छापेमारी के जरिए विधायक पर भाजपा या अकाली दल में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने जलालाबाद के विधायक रामिंदर सिंह आवला के मामले का भी हवाला दिया।

विधायक के करीबी सहयोगी जगदेव सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा और अकाली दल के पास मोगा से चुनाव लड़ने के लिए मजबूत उम्मीदवार नहीं है। मोगा के सीनियर डिप्टी मेयर राकेश कुमार बजाज ने भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

हालांकि, राजनीतिक दबाव बनाने के आरोप विधायक के करीबियों और स्थानीय नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। ईडी की ओर से छापेमारी के संबंध में जांच का आधार कथित जमीन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग बताया गया है। कार्रवाई के दौरान किसी नकदी या दस्तावेज की बरामदगी अथवा गिरफ्तारी को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

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