50 हजार का ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया, अब साल में 3 लाख रुपये कमा रहे : अनुसूचित जाति के युवाओं को स्वरोजगार से मिल रहा आर्थिक स्वावलंबन

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मण्डी :  हिमाचल प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के बेरोजगारों युवाओं को आर्थिक स्वावलंबन के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निगम के माध्यम से सुगम एवं सस्ती दर पर ऋण एवं अनुदान प्रदान कर रही है। निगम से सस्ती दर पर ऋण और अनुदान लेकर कई युवा अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।
सालाना 3 लाख रुपये कमा रहे हैं इन्द्रपाल
जिला मण्डी के उपमण्डल सरकाघाट के गांव सनीहण डाकघर गेहरा निवासी इंद्रपाल पुत्र बंशी राम ने निगम से 50 हजार का ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया और अब वे साल में 3 लाख रुपये कमा रहे हैं। इंद्रपाल पहले काम की तलाश में दिल्ली गए थे। लेकिन अच्छी नौकरी और उचित मेहनताना न मिलने के कारण घर वापिस आ गए तथा घर पर ही अपना स्वरोजगार शुरू करने की सोची। इस दौरान उन्होंने बैग बनाने का काम भी सीख लिया। लेकिन गरीबी के कारण वह बैग बनाने का व्यवसाय शुरू नहीं कर सके।
निगम से लिया 50 हजार रुपये का ऋण
इन्द्रपाल को उनके एक मित्र ने निगम कार्यालय के बारे में बताया कि निगम अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए सस्ती दर पर ऋण देता है। वहां पर उन्हें पचास हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से दस हजार रुपये का उपदान भी मिला। उन्होंने अब तक की जमा पूंजी पचास हजार को ऋण साथ मिला कर एक लाख रुपये की मशीनें खरीदी और स्कूल बैग, कैरी बैग इत्यादि बनाने का काम सरकाघाट में ही शुरू किया। अब वे बैगों के इलावा सोफा कवर, बेड कवर, अटैची कवर, गाड़ियों की सीटें और कवर भी बनाते व उनकी रिपेयर भी करते हैं।
इन्द्रपाल ने मुख्यमंत्री का किया धन्यवाद
इन्द्रपाल आज लगभग तीन लाख रूपये तक सालाना वह कमा लेते हैं और अपने परिवारजनों का भरण पोषण कर पाने में समर्थ हो पाए हैं । इन्द्र पाल ने उसे स्वावलम्बी बनाने के लिए मुख्यमंत्री और निगम का आभार प्रकट किया ।
अनुसूचित जाति व जनजाति के निर्धनपरिवारों के लिए गठित है निगम
सरकाघाट स्थित निगम कार्यालय के सहायक प्रबन्धक भूषण कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निगम हिमाचल प्रदेश के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के निर्धन परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा गठित किया गया है। निगम इन वर्गों के परिवारों को अपना कारोबार बढ़ाने तथा अन्य रोजगार धंधे चलाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है।
आर्थिक विकास के लिए चल रही हैं योजनाएं
निगम द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के आर्थिक विकास हेतु बहुत सारी योजनाएं चलाई गई हैं जिनमें मुख्यतः स्वरोजगार योजना, हस्तशिल्प विकास योजना, ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण योजना, दलित वर्ग प्रशिक्षण योजना, हिम स्वावलंबन योजना(प्रथम), हिम स्वावलम्बन योजना (द्वितीय), लघु ऋण /लघु व्यवसाय योजना, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के सौजन्य से शिक्षा ऋण योजना, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के सौजन्य से शिक्षा ऋण योजना, लघु विक्रय केन्द्र हैं।
ऋण लेने के लिए पात्रता की शर्तें
सहायक प्रबंधक ने बताया कि ऋण गरीबी रेखा से नीचे तथा गरीबी रेखा से दोगुनी आय सीमा तक के व्यक्तियों को ही प्रदान किया जाता है। निगम द्वारा चलाई जा रही स्वरोजगार योजना के अधीन इन वर्गों के निर्धन परिवारों को 50 हजार रुपये तक परियोजनाएं चलाने के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जाता है।
समय पर ऋण चुकाने पर केवल 4 प्रतिशत देना होता है ब्याज
स्वरोजगार योजना में पात्र लोगों को परियोजना लागत का अधिकतम दस हजार रूपये पूंजी अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाता है । शेष राशि बैंकों द्वारा ऋण के रूप में उपलब्ध करवाई जाती है। पूंजी अनुदान के अतिरिक्त निगम ऐसे लाभार्थियों को ब्याज अनुदान प्रदान करता है ताकि उन्हें बैंक ऋण पर 4 प्रतिशत से अधिक दर से ब्याज ना देना पड़े। यह सुविधा केवल ऋण की समय पर वापसी करने वाले लाभार्थियों को ही प्राप्त होती है ।
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